पश्चिमी यूपी के जिलों से करीब 50 हजार टन बासमती चावल सऊदी अरब में जाएगा। दुबई में 13 से 17 फरवरी तक हुए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में पहली बार बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम ने भी हिस्सा लिया।
मेले में 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रधान वैज्ञानिक और बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम के प्रभारी डाॅ. रितेश शर्मा ने बताया कि ईरान और संयुक्त अरब अमीरात से बड़े स्तर पर सौदा हुआ है।
दुबई में लगाए गए स्टाल पर वेज और नॉन वेज भारतीय बिरयानी का भी 10 हजार से ज्यादा लोगों ने खूब स्वाद चखा। भारतीय बासमती की खुशबू और गुणवत्ता के चलते विदेशों में मांग बढ़ रही है। एपीडा के सहयोग से प्रतिष्ठान ने कई खाद्य पदार्थों के स्टाल लगाए।
100 देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल
डाॅ. रितेश शर्मा ने बताया कि जिस तरह से पहली बार एपीडा के सहयोग से बीईडीएफ ने स्टाल लगाया है, उसका अच्छा असर दिखा हैैैै। वहां पर 100 देशों के निर्यातक और वैज्ञानिक आए हुए थे, उन्होने भारतीय बासमती व गैर बासमती के बारे में जानकारी ली है।
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इसकी गुणवत्ता उत्पादन और अन्य वैरायटी में क्या फर्क है, इसके बारे में बारीकी से जानकारी ली है। मेले में भारत से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात प्राधिकरण (एपीडा) के चेयरमैन डा. एम.अंगमुथु, डायरेक्टर डॉ. तरुण बजाज, उप महाप्रबंधक विनीता सुधांशु मौजूद रहे।
1121 प्रजाति की रही धूम
मेले में बासमती की 1121 प्रजाति की धूम रही। स्टाल पर पहुंचने वालों ने सबसे ज्यादा इस प्रजाति के बारे में जानकारी ली है। यहां पर विभिन्न देशों से आए निर्यातकों और वैज्ञानिकों व दुबई के लोगों ने सबसे ज्यादा इस प्रजाति को ही पंसद किया है।
यह है खासियत
-चावल लंबा होता है
-औसत पैदावार 45 से 50 कुंतल तक है।
-2005 में आई थी यह प्रजाति।