मेरठ में कोरोना के भय के चलते लोग हर घड़ी भगवान का नाम ले रहे हैं। घरों में हर तरह की सुरक्षा और सावधानियां बरती जा रही हैं। साथ ही पुरोहित, आचार्यों और याज्ञिक की डिमांड मांग भी बढ़ गई है। नवरात्र 25 मार्च से शुरू होंगे। हालांकि इससे हफ्ते भर पूर्व ही शहर में पूजा-पाठ करने वाले ब्राह्मणों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। ऐसे में एक-एक आचार्य दिन में चार से पांच हवन कर रहे हैं।
इंडियन काउसिल ऑफ एस्ट्रालॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि अब अध्यात्म और प्राचीन प्राकृतिक तरीके से ही कोरोना जैसी महामारी को रोका जा सकता है। दुनिया मानती है की मंत्र उच्चारण व यज्ञ कुंड में औषधीय हवन से वातावरण शुद्ध होता हैं।
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि शहर में पुरोहित, आचार्य और याज्ञिक की डिमांड बढ़ गई हैं। शहर में तीन हजार कर्मकाडी ब्राह्मण हैं। एक कर्मकांडी ब्राह्मण दिन में चार से पांच हवन कर रहे हैं।
वैदिक यज्ञ के माध्यम से मंत्रों के जाप के साथ हवन में गाय के दूध का घी, आम की लकड़ी, नीम की छाल, गिलोए, सूखा आंवला, जावित्री, नागरमोथा, बालछड़, सफेद चंदन, सुगंधबाला, कड़वी बछ, साबुत काली मिर्च, हाउबेर, लौंग, इलायची, तेजपत्र, गुग्गल, लोभान, समुद्री झाग, जटामांसी, सूखी तुलसी, अजवायन, कपूर आदि औषधीय गुणों से भरपूर सामग्री को मिलाकर यज्ञ किया जा रहा है।