यह है मामला
चार जून को टेंट कारोबारी कोमल और उसके भाई बिरजू का पुलिसकर्मी आकाश और विकास से विवाद हुआ था। एफआईआर दर्ज न होने पर राज्यमंत्री दिनेश खटीक गुरुवार रात गंगानगर थाने पहुंच गए थे, जहां इंस्पेक्टर गंगानगर राजपाल सिंह और मंत्री की तीखी झड़प हुई थी। ये मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण लखनऊ तक गूंजा। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद गंगानगर थाने में दोनों पुलिसवालों पर मारपीट, तोड़फोड़, लूटपाट और एससी-एसटी एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस वालों की तरफ से भी टेंट कारोबारी कोमल पर मारपीट, डकैती आदि की धाराओं में रिपोर्ट लिखी गई।
हाईप्रोफाइल मामला होते ही छुट्टी पर चले जाते हैं अधिकतर थानेदार
हाईप्रोफाइल मामला होते ही मेरठ में अधिकतर थानेदार छुट्टी चले जाते है। इसे इत्तेफाक कहेंगे या विवादों से बचने का तरीका। मेरठ में ऐसा एक बार नहीं, चार बार हो चुका है। जब-जब मामला हाईप्रोफाइल लोगों से जुड़ा तो संबंधित थानेदार छुट्टी लेकर चले जाते हैं। इसे लेकर पुलिस महकमे में चर्चा है।
विधानसभा चुनाव के दौरान सरधना में पीठासीन अधिकारी के साथ पूर्व विधायक ने मारपीट की थी। मुकदमा सरधना में दर्ज हो गया। मामला लखनऊ तक गूंजा तो अगले दिन इंस्पेक्टर सरधना लक्ष्मण वर्मा छुट्टी पर चले गए। 31 मार्च को हापुड़ रोड पर पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की फैक्टरी चलती पकड़ी गई। खरखौदा में याकूब और उनकी पत्नी संजीदा बेगम, बेटे इमरान और फिरोज समेत 17 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ। यह मामला लखनऊ तक पहुंचा तो इंस्पेक्टर खरखौदा दिनेश उपाध्याय लंबी छुट्टी पर चले गए।
मुकदमे की विवेचना इंस्पेक्टर किठौर को सौंपी गई। कोर्ट में पुलिस व याकूब के परिवार की अर्जी चल रही थी, तभी इंस्पेक्टर किठौर भी छुट्टी पर चले गए। अब मंत्री दिनेश खटीक गंगानगर थाने पहुंचे और एफआईआर न करने पर भड़क गए। इंस्पेक्टर और मंत्री के बीच बहस हुई। यह मामला भी अब लखनऊ तक गूंजा हुआ है। भाजपा नेताओं और विपक्ष भी इसको लेकर चर्चा कर रहा है। दोनों तरफ से मुकदमा दर्ज करने के बाद इंस्पेक्टर गंगानगर राजपाल सिंह भी छुट्टी पर चले गए।