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मेरठ में रेडलाइट एरिया के झूठे हलफनामे पर हाईकोर्ट नाराज, कहा- बाहर लगा ताला, अंदर देह व्यापार

Wed, 24 Apr 2019 04:41 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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रेड लाइट एरिया-मेरठ - फोटो : अमर उजाला
मेरठ का रेड लाइट एरिया बंद करने व देह व्यापार में लिप्त महिलाओं के पुनरोद्धार को लेकर दाखिल याचिका पर डीएम मेरठ, एसपी क्राइम, सीएमओ हाईकोर्ट में पेश हुए। अधिकारियों की ओर से कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि रेड लाइट एरिया बंद कराया गया और अब देह व्यापार नहीं चल रहा है। जिस पर हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने रिपोर्ट झूठी बता दी। हाईकोर्ट ने नाराजगी जताकर बुधवार को पुलिस- प्रशासन और सीएमओ को तलब किया।

बुधवार को कोर्ट ने फर्जी शपथ पत्र लगाने वाले लोगों के खिलाफ कोर्ट ने कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। 30 अप्रैल को फर्जी शपथ पत्र दाखिल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर कोर्ट को अवगत कराने की बात कही है। वहीं कोर्ट ने डीएम एसएसपी व सीएमओ की व्यक्तिगत पेशी स्थगित कर दिया।
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रेड लाइट एरिया - फोटो : अमर उजाला
अधिवक्ता सुनील चौधरी की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही है। सुनील चौधरी ने अधिकारियों के बयान का विरोध करते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्ट है कि रेड लाइट एरिया में बाहर से दरवाजों पर ताला लगा दिया गया है। लेकिन भीतर लड़कियां मौजूद हैं और कोठे बाकायदा संचालित किए जा रहे हैं।

सुनील चौधरी के मुताबिक कोर्ट ने अधिकारियों के हलफनामे पर असंतोष जताकर बुधवार को सभी को फिर से तलब किया है। इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि सीएमओ की रिपोर्ट पर अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है। याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। चौधरी का कहना है कि पुलिस, प्रशासन और सीएमओ ने झूठा हलफनामा कोर्ट में पेश किया था।
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रेड लाइट एरिया - फोटो : अमर उजाला
हलफनामा में इसका जिक्र नहीं 
अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बताया कि आरटीआई और आईजीआरएस के तहत बताया गया कि मेरठ सीएमओ कार्यालय से रेडलाइट एरिया में 20 हजार कंडोम वितरित किए हैं। छह देह व्यापार में लिप्त महिलाओं को एचआईवी पॉजीटिव और सात की मौत होना बताया। इन सभी को पुलिस, प्रशासन व सीएमओ के हलफनामे में इसका जिक्र तक नहीं किया। अधिकारियों के हलफनामे में अधिवक्ता ने कई सवाल किए, उसका जवाब अधिकारी नहीं दे पाए। जिसके बाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि उनके हलफनामे से असंतुष्ट हैं। 

सीबीआई जांच कराएं क्या 
सुनवाई के दौरान मौजूद लोगों के अनुसार न्यायमूर्ति इस पूरे प्रकरण पर बहुत सख्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने पुलिस के हलफनामे पर कहा कि क्या इस प्रकरण पर सीबीआई जांच बैठाएं। न्यायमूर्ति ने बुधवार दोपहर दो बजे तक इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। 

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रेड लाइट एरिया में जांच करने पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
जिलाधिकारी कराते रहे जवाब तैयार 
बुधवार को पूरे मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश मिलने के बाद जिलाधिकारी अनिल ढींगरा महाधिवक्ताओं से मिले और अपना जवाब दाखिल कराने में जुटे रहे। सूत्रों के अनुसार इस मामले को लेकर पूरे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। 

जिलाधिकारी कराते रहे जवाब तैयार 
बुधवार को पूरे मामले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश मिलने के बाद जिलाधिकारी अनिल ढींगरा महाधिवक्ताओं से मिले और अपना जवाब दाखिल कराने में जुटे रहे। सूत्रों के अनुसार इस मामले को लेकर पूरे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। 
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रेडलाइट एरिया
25 कोठों पर देह व्यापार में लिप्त महिलाओं का मालिकाना हक 
पुलिस के मुताबिक रेडलाइट एरिया में 75 कोठे हैं। जिसमें करीब 25 कोठों पर देह व्यापार में लिप्त महिलाओं का मालिकाना हक है। जबकि कई कोठे सालों से किराये पर होने बताए हैं। वहीं, कई लोग तो खुद देह व्यापार कराकर कोठे चलाते हैं। पुलिस का दावा है कि कोठे चलाने वालों पर मजबूत कार्रवाई होगी। मालिकाना हक वाले कोठों पर देह व्यापार में लिप्त महिलाओं को रेस्क्यू कराया जाएगा। 

कई कोठे खाली कराना होगा चुनौती 
रेडलाइट एरिया में कई कोठे खाली कराना पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती बनेगा। मालिकाना हक बताने वाली महिलाएं गलत काम करती हैं। इनका कोठा किस नियम के तहत खाली होगा। हालांकि पुलिस का कहना कि इन कोठों पर कई लड़कियां बाहर की हैं। उनका रेस्क्यू तो कराया जा सकता है। इसको लेकर पुलिस-प्रशासन अधिकारी कार्रवाई करने के लिए प्लानिंग बना रहे हैं। 
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मेरठ में रेड लाइट एरिया में जांच करने पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
कलक्ट्रेट में बना चर्चा का विषय
मंगलवार को पूरा दिन जहां यह मामला कलक्ट्रेट में चर्चा का विषय बना रहा। वहीं बुधवार को इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दे दिए गए। अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना था कि पुलिस दोषी है। पुलिस की शह पर ही कबाड़ी बाजार में कोठे हैं। यदि पुलिस सख्ती करे तो एक भी कोठा संचालित नहीं हो सकता है। हालांकि इस प्रकरण पर न्यायालय की सख्ती से अधिकारी संतुष्ट भी हैं, क्योंकि पुलिस अब अपने बचाव में इस पर सख्त कार्रवाई कर इसे हमेशा के लिए बंद करा देगी।  

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