सेहत सबसे ज़रूरी...फिर भी डॉक्टरों की कमी नहीं हो रही पूरी
- मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों का टोटा
- 103 डॉक्टर कम...कैसे मिले बेहतर इलाज
- मेडिकल कॉलेज, सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर हर साल 25 लाख से ज़्यादा कराते हैं इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। चिकित्सक जनता के विश्वास की डोर है। वे न दिन देखते हैं ना रात। न मरीज़ का मजहब देखते हैं न जात। उनका मकसद सिर्फ मरीज का बेहतर इलाज करना होता है। यही वजह है कि लोग उन्हें भगवान का दूसरा रूप भी मानते हैं। कोरोना काल में यह साबित भी हो गया है, लेकिन मेरठ के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की बड़ी कमी है। सबसे ज़रूरी होने के बावजूद लंबे समय से इसे दूर नहीं किया जा सका है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर 103 चिकित्सक मानकों से कम हैं, जबकि इन स्थानों पर हर साल इलाज के लिए 25 लाख से ज़्यादा मरीज़ आते हैं।
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सीएचसी-पीएचसी पर 20 चिकित्सक कम
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के अंतर्गत 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 32 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 26 अर्बन हेल्थ सेंटर हैं। यहां 20 चिकित्सक मानकों से कम हैं। सीएचसी-पीएचसी और अर्बन हेल्थ सेंटर आदि पर 182 चिकित्सक होने चाहिए, लेकिन 162 हैं। इनमें अधिकांश जगह सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर हैं, विशेषज्ञ नहीं। 12 सर्जन होने चाहिए, मगर है सिर्फ एक। इसी तरह फिजिशियन और रेडियोलॉजिस्ट भी 12-12 होने चाहिए, लेकिन एक भी नहीं है। गायनिक 15 होनी चाहिए, लेकिन हैं सिर्फ चार।
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महिला अस्पताल में 14 स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी
महिला जिला अस्पताल में जहां हर माह एक हजार से ज्यादा डिलिवरी होती हैं, वहां स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। यहां 24 महिला चिकित्सक होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 10 हैं।
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जिला अस्पताल में 25 चिकित्सक कम
जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 54 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 29 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। 25 चिकित्सकों की कमी है। इनमें एक सर्जरी (शल्य), दो बेहोशी (निश्चेतक), दो रेडियोलॉजिस्ट, दो अस्थि रोग विशेषज्ञ, दो टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ, एक-एक नाक-कान गला रोग (ईएनटी), दंत रोग विशेषज्ञ, यूरोलोजिस्ट, न्यूरो सर्जन, न्यूरो फिजिशियन, हृदय रोग, नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ), ब्लड बैंक व आईसीयू के लिए 9 चिकित्साधिकारियों के पद रिक्त चल रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में 44 चिकित्सकों की कमी
मेडिकल कॉलेज में 44 चिकित्सकों व शिक्षकों की कमी है। फार्मेसी में एक सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) का पद खाली है। मेडिसिन में आचार्य (प्रोफेसर), सह आचार्य (एसोसिएट प्रोफेसर) और सहायक आचार्य का एक-एक पद, रेडियोथेरेपी में रेडियोलॉजिस्ट, सह आचार्य और सहायक आचार्य के एक-एक, रेडियोडायग्नोसिस में सह आचार्य और सहायक आचार्य को दो-दो पद खाली हैं। एनेस्थीसिया (बेहोशी) आचार्य, सह आचार्य और सहायक आचार्य के एक-एक पद, ह्यूमन मेटाबोल्जिम में सह आचार्य और सहायक आचार्य के एक-एक पद, ईएनटी में आचार्य, सहायक आचार्य का एक-एक पद और गायनोकोलोजी में सह आचार्य का एक पद खाली है। फार्माकोलोजी के सहायक आचार्य के दो पद, फोरेंसिक मेडिसिन में एक पद, कम्यूनिटी मेडिसिन के दो पद, सामान्य मेडिसिन के पांच पद खाली हैं। न्यूरोलॉजी में सहायक आचार्य का एक पद, टीबी एंड चेस्ट में आचार्य और सहायक आचार्य एक-एक पद, मानसिक रोग विशेषज्ञ के दो पद, बच्चा रोग विशेषज्ञ के छह पद खाली चल रहे हैं। एनाटोमी (मानव संरचना) और माइक्रोबायोलॉजी में दो पद, फिजियोलोजी, बायोकेमिस्ट्री में एक-एक पद खाली चल रहे हैं।
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मेडिकल में चिकित्सकों की संख्या बढ़नी चाहिए। शासन से इसके लिए पत्राचार चल रहा है। संविदा पर कुछ चिकित्सक रखे भी गए हैं।
- डॉ आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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डॉक्टरों की स्वास्थ्य विभाग में कमी है। बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के लिए यह कमी दूर होनी जरूरी है।
- डॉ अखिलेश मोहन, सीएमओ
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। पर्याप्त चिकित्सक हों तो इलाज और बेहतर हो सकेगा।
- डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल