पुरुषों पर नहीं असर, परिवार नियोजन का जिम्मा महिलाओं पर
तीन साल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, नसबंदी कराने में पुरुष फिसड्डी, महिलाएं आगे
अरीश रिज़वी
मेरठ। जिस तरह महिलाएं अब हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे निकलती जा रही हैं, उसी तरह परिवार नियोजन का जिम्मा भी उन्होंने अपने कंधों पर लिया हुआ है। जिले में परिवार नियोजन की भागीदारी में पुरुष फिसड्डी हैं। यहां महिलाएं ही ज़्यादा जिम्मेदारी निभा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पिछले तीन साल के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। इस दौरान कुल 11961 नसबंदी ऑपरेशन किए गए, जिनमें से 95 प्रतिशत से भी ज्यादा महिलाओं ने कराए हैं, जबकि पुरुष पांच प्रतिशत का आंकड़ा भी नहीं छू पाए हैं। तकनीक उपलब्ध होने के बाद भी परिवार नियोजन का भार महिलाएं ही ज्यादा उठा रही हैं। बुधवार से शुरू हुए पुरुष नसबन्दी पखवाड़े के पहले दिन भी महिलाओं ने ही 22 नसबंदी कराई, पुरुष ने किसी ने नहीं कराई।
नसबंदी ऑपरेशन का हाल
वर्ष महिलाएं पुरुष
2021-22 3364 222
2022-23 4864 204
2023-24 3194 113
{2023-24 के आंकड़े अक्टूबर तक के हैं।}
गलतफहमी
नसबंदी कराने से शारीरिक कमजोरी आती है
भूख कम लगती है
सिर्फ सर्दियों में करवानी चाहिए
हकीकत
शारीरिक कमजोरी नहीं आती है
भूख और वजन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है
पुरुषों में जागरूकता का अभाव है
स्वास्थ्य विभाग लक्ष्य नहीं कर पा रहा पूरा : स्वास्थ्य विभाग
अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। मेरठ में हर साल का लक्ष्य 16 हजार नसबंदी का है, मगर यह किसी भी साल पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए लाभार्थी को तीन हजार रुपये और प्रेरक को चार सौ रुपये दिए जाते हैं। पहले यह क्रमशः दो हजार रुपये और तीन सौ रुपये दिए जाते थे।
पुरुषों से ज्यादा जागरूक हैं महिलाएं
सीएमओ डॉ अखिलेश मोहन ने बताया कि परिवार नियोजन में महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा जागरूक हैं। नसबंदी के अलावा बच्चों में अंतर रखने की विधि पीपीआईयूसीडी भी महिलाएं अपना रही हैं। इसके अलावा अंतरा इंजेक्शन भी ले रही हैं। उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज, मवाना, सरधना और दौराला सीएचसी पर नसबंदी कराई जाती है। इसके लिए जागरूकता अभियान भी समय-समय पर चलाए जाते हैं, मगर पुरुषों में इसे लेकर उत्साह कम है।