अल्लाह के नबी ने फरमाया कि हज और उमरा दोनों इंसानों के गुनाहों को दूर कर देते हैं। एहराम बिना सिला सफेद रंग का कपड़ा होता है, जिससे हाजियों को बदन ढकना होता है। इस दौरान खुशबू लगाना, नाखून, बाल काटना और दाढ़ी बनाना मना है। एहराम बांधने के लिए एक सीमा तय की गई है। अरब में एक जगह यलमलम को पार करने से पहले आपको बदन पर एहराम बांधना जरूरी है। हज के पांच अरकान के बारे में गांव पांचली स्थित जामिया दारूस सलाम के मोहतमिम मौलाना युसुफ कासमी ने विस्तार से जानकारी दी।
हज के पांच अरकान
पहला दिन : 8 जिलहिज चांद की आठ तारीख को होता है। इस दिन सभी जायरीन मीना में एकत्र होते हैं।
दूसरा दिन : 9 जिलहिज चांद की नौ तारीख को सभी हज यात्री मीना से अराफात रवाना होते हैं। अराफात की मुजदलफा से दूरी लगभग छह किलोमीटर है। यहां पहुंचकर मगरिब और ईशा की नमाज एक साथ अदा करनी होगी, चाहे वक्त कुछ भी हुआ हो।
तीसरा दिन : 10 जिलहिज में मीना पहुंचकर तीन शैतानों में से एक शैतान को कंकरी मारनी होगी। इस दिन ईदुल अजहा (बकरीद) होती है। इसके बाद हाजी मक्का रवाना होंगे। यदि कुर्बानी की वजह से देरी हो जाए तो हाजी अगले दिन भी मक्का जा सकते हैं। मक्का पहुंचकर हज का अहम अरकान तवाफ-ए-जियारत करना होता है।
चौथा दिन : 11 जिलहिज में तीनों शैतानों पर कंकरी मारने का सिलसिला चलता है।
पांचवा दिन : 12 जिलहिज में भी तीनों शैतानों को कंकरी मारी जाती है। इस दिन कंकरी मारने के बाद हाजियों का मक्का वापस आना होता है।