पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी पद्म सिंह, वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता प्रमोद कुमार त्यागी और शुचि शर्मा ने बताया कि सतेंद्र के भाई राजेंद्र उनके साथ जमीनी विवाद को लेकर रंजिश रखते थे। राजेंद्र के बेटे अरुण उर्फ पिंटू ने पहले भी जान से मारने की धमकी दी थी। बाद में पिंटू ने अपने दोस्त अजीत उर्फ सुमित, जितेंद्र, रवि, जितेंद्र हुड्डा और मैनपाल ने दंपती की गोली मारकर हत्या कर दी। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में 14 गवाह पेश किए गए।
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न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राजेंद्र के पुत्र अरुण, अजीत और जितेंद्र को हत्या का दोषी माना। वहीं हत्यारोपी रवि को दोषमुक्त करार दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मैनपाल की मौत हो चुकी है और जितेंद्र हुड्डा अब तक फरार है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह सजा सुनाई।