बाजार में चल रहे सोने के दो भाव
हाल में आए बजट में सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी ढाई प्रतिशत बढ़ा दी। पहले सोने पर 10 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी। अब सोने पर साढ़े बारह प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी है। तीन प्रतिशत जीएसटी मिलाकर सोने पर कुल साढ़े 15 प्रतिशत तक कर लग रहा है। इस कारण बाजार में सोने की दो कीमतें हो गई हैं।
बिना टैक्स वाला सोना सस्ता है, जो बिना बिल के बिक रहा है। वहीं जो कारोबारी टैक्स अदा कर एक नंबर में सोने की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं, उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है। अधिक कर देने के कारण वो 1500 से 2000 रुपये अतिरिक्त कीमत पर सोना बेच रहे हैं।
सात साल में 11 गुना बढ़ा टैक्स
2012 में सोने पर 250 रुपये प्रति दस ग्राम कस्टम ड्यूटी व 250 रुपये प्रति दस ग्राम वैट था। इस तरह दस ग्राम सोने पर 500 रुपये टैक्स था। इसके बाद सोने पर टैक्स की दरें लगातार बढ़ती गईं। आज दस ग्राम सोने पर 5500 रुपये टैक्स लग रहा है। सात साल में सोने पर टैक्स की दर 11 गुना तक पहुंच गई।
टैक्स बढ़ने के कारण सोने की तस्करी भी बढ़ी है। दो माह में सोने के दाम प्रति दस ग्राम पर छह हजार रुपये तक बढ़ चुके हैं। घरेलू बाजार में गुरूवार को सोना 250 रुपये चढ़कर 40,220 रुपये प्रति दस ग्राम पहुंच गया। बुधवार को भी 300 रुपये का सीधा इजाफा हुआ था।
बीते 10 सालो में बढ़े दाम
वर्ष प्रति 10 ग्राम सोने के दाम
2008- 12,500
2009- 14,500
2010- 18,500
2011- 26,400
2012- 29,500
2013- 29,600
2014- 28,000
2015- 26,300
2016- 28,600
2017- 29,600
2018- 32,600
2019- 40,220
असमंजस में है ग्राहक
दो रेट चलने के कारण बाजार में ग्राहक नहीं हैं। ग्राहक असमंजस में है कि बिल लेते ही सोने की कीमतों में सीधे दो हजार रुपये का अंतर आ रहा है। नंबर दो में तस्करी का सोना आ रहा है, जो बिना बिल के बेचा जा रहा है। -विजयआनंद अग्रवाल, महामंत्री मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन
नहीं आ रहे है खरीदार
सोना अब तक की सर्वाधिक कीमतों पर पहुंच चुका है। सात सालों में सोने पर टैक्स 11 गुना तक बढ़ चुक ा है। इसकी वजह से ग्राहक बाजार में नहीं आ रहा। बस रिप्लेसिंग क ा काम चल रहा है। -दिनेश रस्तोगी, सराफा कारोबारी
ज्वैलरी सेक्टर पर संकट
2008-09 में जब ग्लोबल मंदी हुई थी, तब भी सोना बाजार के हालात इतने खराब नहीं थे, जैसे अब हैं। पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंदी का असर सोना बाजार में दिख रहा है। ज्वैलरी सेक्टर पर भी संकट है। -दिनेश भारद्वाज अध्यक्ष इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन