गत्ता फैक्टरी के प्रोसेसिंग टैंक में जहरीली गैस बनने से श्रमिक की मौत, मालिक गंभीर
मोदीनगर। भोजपुर के दतैड़ी गांव स्थित धन लक्ष्मी गत्ता फैक्टरी में मंगलवार दोपहर करीब 15 फुट गहरे प्रोसेसिंग टैंक में जहरीली गैस बनने से श्रमिक ललित शर्मा (50) की मौत हो गई। श्रमिक को बचाने के प्रयास में टैंक में उतरा फैक्टरी मालिक भी गैस की चपेट में आ गया। उसे गंभीर अवस्था में हायर सेंटर रेफर किया गया है। हादसा टैंक की सफाई के दौरान हुआ। सूचना के बाद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा कर जांच पड़ताल की। पुलिस ने शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पिलखुवा स्थित साकेत निवासी सचिन सिंहल पुत्र कालूराम की नगर से सटे भोजपुर थाना क्षेत्र के दतैड़ी गांव में धनलक्ष्मी के नाम से गत्ता फैक्टरी है। फैक्टरी में लगभग 20 श्रमिक कार्य करते है। फैक्टरी परिसर में करीब 15 फुट गहरा एक प्रोसेसिंग टैंक बना हुआ है। बताया गया कि मंगलवार को टैंक की सफाई कराई जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सफाई के दौरान टैंक में कुछ मलबा रह गया। जिसे साफ करने के लिए पिलखुवा के गैस गोदाम निवासी श्रमिक ललित शर्मा पुत्र रामेश्वर टैंक में उतर गया। उतरते ही वह बेहोश होकर गिर गया। बचाने के प्रयास में सचिन सिंहल भी टैंक में उतरे तो वह भी बेहोश हो गए। दोनों को बेहोश देख मौके पर मौजूद श्रमिकों ने शोर मचा दिया। दोनों को टैंक से निकालकर पिलखुवा स्थित एक मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां चिकित्सकों ने ललित को मृत घोषित कर दिया। फैक्टरी संचालक सचिन सिंहल की नाजुक स्थिति के चलते उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। बताया गया कि ललित कई वर्षों से फैक्टरी में काम करता था। सूचना के बाद सीओ सुनील कुमार सिंह, तहसीलदार हरिप्रताप सिंह व थानाध्यक्ष भोजपुर ने घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी ली।
एहतियात बरतना जरूरी
ग्रामीणों के अनुसार गांव के समीप कई वर्षों से यह फैक्टरी संचालित हो रही है। मगर फैक्टरी में सुरक्षा के मानक पूरे नहीं है। एमएम डिग्री कॉलेज मोदीनगर के रसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. मयंक त्यागी ने बताया कि किसी भी गहरे स्थान पर साफ-सफाई के बाद उसे एक दो दिन के लिए खुला छोड़ देना चाहिए। अगर किसी कारणवश उसमें जाना भी पड़े तो बगैर ऑक्सीजन सिलेंडर के नीचे नहीं उतराना चाहिए। ऐसे स्थानों पर बैक्टीरिया ऑक्सीजन खत्म करके कॉर्बन मोनो ऑक्साइड और फोरजिन जैसी जहरीली गैस उत्सर्जित करते हैं। यह गैस साइलेंट किलर होती है।
ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर निकाला
गत्ता फैक्टरी गांव से कुछ मीटर की दूरी पर है। श्रमिक ललित और फैक्टरी संचालक सचिन के बेसुध होने के बाद अन्य श्रमिकों के हाथ पांव फूल गए। उन्होंने जोर से बचाव बचाव का शोर मचाया जिसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण उधर दौड़ पड़े। कुछ ग्रामीण बगैर जान की परवाह किए मुंह पर कपड़ा बांधकर टैंक में उतरे और दोनों को बाहर निकाला। गनीमत रही कि अन्य लोग गैस की चपेट में नहीं आए वरना स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।