ये है ज्योग्रॉफिक इंफोरमेशन सिस्टम
जमीन की सतह को चिह्नित करने के लिए पहले दक्षांतर और अक्षांतर के जरिए कोआर्डिनेट निकालने होंगे। इसके बाद स्थान का पता चल सकेगा कि यहां पर किस तरह की जमीन उपलब्ध है। जिससे घर बैठे ही शहरवासी प्लाट का भू-उपयोग जान सकेंगे।
जीआइएस सर्वे किया जा चुका
कुछ दिन पहले ही प्रदेश सरकार की तरफ से नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की टीम जिले में पहुंचकर अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर चुकी है। इसके बाद ही महायोजना-2031 को बनाया जाना है। जिससे मास्टर प्लान के समय अवैध कॉलोनियों को इसमें शामिल न किया जा सके। तीन से पांच दिन तक चले सर्वे में शहर के सभी इलाकों में रिमोट सेंसिंग सेंटर की टीम ने यह कार्य किया था।
महायोजना 2031 की तैयारी
नई तकनीक पर महायोजना-2031 का नक्शा तैयार करने की योजना बनी है। इस बार केंद्र सरकार के दखल के बाद सही तरीके से महायोजना पर क्रियान्वयन किया जाएगा - इश्तियाक अहमद, मुख्य नगर नियोजक