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फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनवा मिलाई करने पहुंचे पांच लोग पकड़े

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फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट पर मुलाकात को पहुंचे पांच दबोचे
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मेरठ। फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनवाकर जेल में बंदियों से मुलाकात के लिए पहुंचे पांच लोगों को जेल प्रशासन ने दबोच लिया। छानबीन की गई तो पता चला कि सभी रिपोर्ट निजी लैब से तैयार की गई थी। इस बारे में अफसरों को जानकारी दी गई। काफी देर तक गहमा-गहमी होती रही। बाद में सभी को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में 19 मार्च, 2020 से कोविड संक्रमण के चलते मुलाकात व्यवस्था बंद कर दी गई थी। हाल ही में शासन ने कुछ शर्तों के साथ मुलाकात व्यवस्था बहाल की। इसके तहत बंदी से मिलाई के लिए आने वाले हर व्यक्ति के पास आरटीपीसीआर रिपोर्ट होना अनिवार्य था। सोमवार को मिलाई का पहला दिन रहा। सुबह सात बजे से भीड़ जुटनी शुरू हो गई।
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इसी दौरान स्कैनिंग मशीन ने पांच फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट को पकड़ लिया। पांचों से पूछताछ की गई तो वह उन्हें सही बताने लगे। अफसरों को जानकारी दी गई, जिसके बाद पांचों से एक बार फिर पूछताछ हुई तो पता चला कि वह रिपोर्ट उन्होंने निजी लैब से बनवाई हैं। काफी देर गहमा-गहमी होती रही। बाद में अफसरों ने पहली शिकायत होने के कारण पांचों को चेतावनी देकर वहां से भेज दिया। काफी देर मामला चर्चा में बना रहा।
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पहले दिन 13 पर्ची हुई अस्वीकृत
- सुबह सात से 11 बजे तक पर्ची बनाने का काम हुआ। सख्ती के बीच कुल 77 पर्ची बनीं। आरटीपीसीआर रिपोर्ट को क्यूआर स्कैनर से स्कैन करके ही मिलाई करने वाले को आगे भेजा जा रहा था। इसी दौरान सामने आया कि पांच आवेदकों के पास रिपोर्ट नहीं हैं। तीन ऐसे निकले, जिनके पास 72 घंटे से काफी पुरानी रिपोर्ट थीं। पांच ऐसी रिपोर्ट थीं, जिनका क्यूआर स्कैनिंग में कोई रिकार्ड नहीं मिला। इन सभी 13 लोगों को लौटा दिया गया।
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परिजनों से मिलकर नम हुई आंखें
करीब डेढ़ साल के इंतजार के बाद बंदियों को अपने परिजनों से मिलने का मौका मिला। ऐसे में कई परिजन भावुक हो गये। फिलहाल एक बंदी से सप्ताह में एक बार परिजन मुलाकात कर सकेंगे। जेलर राजेंद्र सिंह ने बताया कि लंबे इंतजार के बाद मिलाई को लेकर परिजन उत्साहित नजर आए।
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पहले दिन 64 लोगों ने अपने बंदियों से मुलाकात की। कुछ बंदी गलत तरीके से मिलाई का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें पहला दिन होने के कारण चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। आगे ऐसा मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। - राकेश कुमार, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जिला कारागार
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