लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। अब 370 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का भाव हुआ। किसान नेता घोषित गन्ना मूल्य को उम्मीद से बहुत कम बता रहे हैं। उनका कहना है कि जिले के कोल्हुओं पर भी 400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ने की खरीदारी कर रहे हैं। सरकार को फसलों की लागत और महंगाई को देखते हुए कम से कम गन्ना मूल्य 400 घोषित करना चाहिए था।
बिजनौर में राष्ट्रीय किसान मजदूर के जिला अध्यक्ष विनोद कुमार बिट्टू का कहना है कि फसलों की लागत और बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने गन्ना मूल्य बहुत कम घोषित किया है, जबकि कई साल से गन्ना मूल्य घोषित ही नहीं हुआ था।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने कहा कि गन्ना मूल्य घोषित बहुत कम है। सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
राजू तोमर बोले- किसानों के साथ किया धोखा
बागपत से किसान राजू तोमर ने कहा कि गन्ना मूल्य में 20 रुपये की बढ़ोतरी करके सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। गन्ने की उत्पादन लागत बढ़ने के कारण किसानों की सरकार से मांग थी कि इस बार 400 रुपये क्विंटल का भाव घोषित हो। लेकिन प्रदेश सरकार और निजी चीनी मिल मालिकों की साठगाठ के कारण प्रदेश का गन्ना किसान फिर छला गया। प्रदेश में गन्ना किसानों को पंजाब और हरियाणा से कम भाव मिलेगा।
बताया गया कि सत्र 2020-21 में गन्ना मूल्य 315 और 325 रुपये प्रति क्विंटल था। अगले साल 2021-22 में 25 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की बढ़ोतरी की गई थी। जब गन्ना मूल्य 340 और 350 रुपये हुआ था। अब बढ़ोतरी के बाद गन्ना मूल्य 360 और 370 प्रति क्विंटल हो गया है।
चीनी मिलों से ज्यादा पावर कोल्हुओं पर गन्ने का भाव
किसान और किसान नेताओं का कहना है कि सरकार ने 20 रुपये गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी कर ऊंट के मुंह में जीरे जैसा काम किया। घोषित गन्ना मूल्य से तो ज्यादा पावर कोल्हुओं और क्रशरों में गन्ने का भाव चल रहा है। बिजनौर जिले में कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कोल्हुओं के संचालक गन्ना खरीद रहे हैं।