तो ऐसे ही चलता रहेगा मौत का सिलसिला
तीन लोगों की मौत के बाद भी आबकारी विभाग की नींद नहीं टूटी है। यह पहला मामला नहीं है जब जहरीली शराब से जिले में मौत हुई है। पांच साल पहले भावनपुर और परीक्षितगढ़ में जहरीली शराब से पांच लोगों की मौत हुई थी। साल 2019 में उत्तराखंड और सहारनपुर में जहरीली शराब से 50 से ज्यादा लोगों की जान गई। उसके बावजूद शहर से देहात तक अवैध शराब का धंधा चलता रहा।
मेरठ में थे आबकारी आयुक्त
आबकारी विभाग कितना अलर्ट है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शराब से तीन मौत होने के दौरान आबकारी आयुक्त प्रयागराज पी गुरु प्रसाद मेरठ में ही थे। उन्हें शासन ने मेरठ का नोडल अधिकारी बनाया हुआ है। आबकारी आयुक्त के जिले में रहते हुए भी आबकारी विभाग यह पता नहीं लगा सकता कि मौत कैसे हुई है। इससे विभाग सवालों के घेरे में है।
हत्या में दर्ज हुआ केस
रोहटा पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी सचिन, उसके पिता हरफूल, सुखपाल व उसके बेटे अनुज को हत्या की धारा में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पीड़ित परिजनों ने शराब में जहरीला पदार्थ मिलाकर देने का आरोप लगाया था, जिसके चलते पुलिस ने हत्या की धारा लगाई थी।
डूंगर गांव में तीन लोगों की मौत की बात गलत है। तेजवीर की मौत बीमारी से हुई थी, जबकि अन्य दो लोगों की मौत शराब से नहीं हुई। एफआईआर में लिखा है कि शराब में जहर दिया गया था।
- आलोक कुमार, जिला आबकारी अधिकारी
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/