शारदा ग्रुप की फैक्टरी
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नोएडा में हैसिंडा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लोटस 300 प्रोजेक्ट में 330 फ्लैट बनाने के लिए निवेशकों से 636 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। आरोप है कि कंपनी ने लोगों को फ्लैट देने के बजाय प्रोजेक्ट की सात एकड़ भूमि अन्य बिल्डर को विक्रय कर दी थी। इसके बाद निवेशकों ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में शारदा ग्रुप के खिलाफ केस कराए थे। मामला कोर्ट पहुंचा जहां से ईडी को जांच के आदेश हुए। शारदा ग्रुप के मालिकों के मेरठ साकेत स्थित बंगला-192ए पर मंगलवार को ईडी ने इसी कड़ी में कार्रवाई की थी।
रिठानी में उनके दफ्तर और गगोल रोड की फैक्टरी में भी जांच की। जिसमें पांच करोड़ रुपये के हीरे भी मिले। बताया गया है कि मेरठ के पूर्व कमिश्नर मोहिंदर सिंह की भूमिका जांच चल रही है, जोकि नोएडा के चेयरमैन और सीईओ भी रह चुके है। मेरठ में कमिश्नर रहने के दौरान गुप्ता बंधु से गठजोड़ होना बताया गया।
84 करोड़ का एमओयू, खर्च हो गए 1400 करोड़
नोएडा में दलित प्रेरणा स्थल के निर्माण के दौरान लोकल फंड ऑडिट की रिपोर्ट में सवाल उठाए गए थे। उस समय नोएडा प्राधिकरण में मोहिंदर थे। रिपोर्ट में बताया गया था कि यूपी निर्माण निगम के साथ प्राधिकरण का 84 करोड़ का एमओयू कराया गया था। इसी फंड से दलित प्रेरणा स्थल का निर्माण होना था, लेकिन इसके निर्माण में जमकर पैसे खर्च किए गए। आलम यह रहा कि इसे बनाने में करीब 1000 से 1400 करोड़ रुपये तक खर्च हुए। यह नियम के इतर किए गए। इसकी जांच अभी भी चल रही है। यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा था।