मेरठ में जिला पंचायत चुनाव की तिथि भले ही घोषित नहीं हुई है लेकिन, सत्ताधारी भाजपा के साथ ही सपा-रालोद ने भी अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहे हैं। इस सबके बीच सबसे बड़े दल के रूप में उभरी बसपा का रुख सबसे अहम हो गया है। जिला पंचायत सदस्य सलोनी गुर्जर के दलबदल से बसपा आहत है। हालांकि कोई भी बसपा नेता स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बोल रहा है। उनका कहना है कि पूरा मामला हाईकमान के पाले में है। वहां से जो भी निर्देश होगा, उसी पर अमल किया जाएगा।
जिला पंचायत चुनाव में बसपा के सर्वाधिक नौ सदस्य विजयी हुए हैं। सपा के सात और रालोद के छह-छह सदस्य निर्वाचित हुए हैं। सत्ताधारी पार्टी को हराने के लिए सपा-बसपा और रालोद ने संयुक्त प्रत्याशी खड़ा करने की रणनीति बनाई थी लेकिन, सपा ने वार्ड नंबर छह से निर्वाचित सदस्य सलोनी को तोड़कर न केवल प्रत्याशी घोषित कर दिया, बल्कि सपा की सदस्यता भी दिला दी। इससे बसपा तिलमिलाई हुई है और इसे सपा का धोखा करार दे रही है।
बसपा जिलाध्यक्ष मोहित जाटव का कहना है कि भाजपा के खिलाफ संयुक्त प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने की बात हुई थी लेकिन, सपा ने सलोनी को पार्टी ज्वॉइन कराकर प्रत्याशी घोषित कर पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। पूरे घटनाक्रम से हाईकमान अवगत है। पार्टी अपना प्रत्याशी खड़ा करने की संभावना तलाशने के साथ ही पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। हाईकमान का जो भी निर्देश होगा, उसके अनुसार ही जिला संगठन काम करेगा।
उधर, राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि बसपा हाईकमान की तरफ से भी सपा से दूरी बनाने के संकेत मिले हैं। बसपा का अगर यही रुख रहता है तो भाजपा के साथ ही सपा-रालोद की चुनौती बढ़ेगी। उसे अपना प्रत्याशी जिताने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।