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काव्या हत्याकांड: कातिल मां और उसके प्रेमी भतीजे को आजीवन कारावास; अवैध संबंधों को छिपाने की लिए की थी हत्या

Sat, 17 Aug 2024 07:19 PM IST
श्याम जी. संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़

सार

हापुड़ जिले के गांव जखैड़ा रहमतपुर में मां और तेहरे भाई को आपत्तिजनक स्थिति में देख लेने पर काव्या की पीट -पीटकर कर दी गई थी। 
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दोषी और काव्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बहादुगढ़ थाना क्षेत्र के गांव जखैड़ा रहमतपुर में 31 मार्च को अवैध संबंधों को छिपाने को लेकर हुई छह वर्षीय मासूम काव्या की हत्या के मामले में न्यायालय ने मृतका की मां और तहेरे भाई को दोषी करार दिया है। घटना के मात्र 139 दिन में न्यायालय ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

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बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव जखैड़ा रहमतपुर में खंडहर में छह वर्षीय काव्या का शव पड़ा मिला था। इस मामले में मृतका के पिता राजीव तोमर ने बहादुरगढ़ थाने में 31 मार्च को मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि उसकी पुत्री काव्या शाम करीब पांच बजे गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के सामने खेल रही थी। शाम करीब छह बजे उसकी पत्नी सुलेखा ने तलाश किया तो काव्या कहीं नहीं मिली। गांव के अनेकों लोगों व परिजन ने तलाश की तो बिजेंद्र तोमर के खंडहरनुमा मकान के कमरे में शाम को करीब 8.45 बजे वह मृतक अवस्था में पड़ी मिली।

काव्या के गले, चेहरे व सिर आदि पर चोट के निशान थे। इससे ऐसा लगता है कि काव्या की किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा हत्या की गई है। पुलिस की जांच के बाद दो अप्रैल राजीव तोमर ने एक अन्य तहरीर देते हुए बताया कि काव्या के साथ हुई घटना की जानकारी करने पर पता चला है कि उसकी पत्नी सुलेखा और भतीजे अंकित को काव्या ने आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। जिसके बाद सच्चाई छिपाने के लिए सुलेखा व अंकित द्वारा काव्या की घर की रसोई में हत्या कर शव को खंडहर में फेंक दिया गया।
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पुलिस ने इस मामले की जांच कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अभियुक्त अंकित कुमार एवं सुलेखा को धारा 302 में सश्रम आजावीन कारावास व 20-20 हजार रुपये के आर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक अभियुक्त को एक एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। जबकि धारा 201 में तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतेगा। कुल अर्थदंड धनराशि में से राशि 20,000 रुपये राज्य सरकार को तथा शेष धनराशि अर्थात 30,000 रुपये मृतका काव्या के पिता को प्रतिकर के रूप में देय होगी।

घर में मिले खून के निशान बने अहम सुबूत
काव्या हत्याकांड में फारेंसिक टीम को मृतका के घर में मिले खून के धब्बे ही इस हत्याकांड में अहम साक्ष्य रहे। प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि हत्याकांड के बाद पुलिस और फारेंसिक टीम मौके पर पहुंची थी। जहां जांच के दौरान पुलिस को सबसे पहले रसोई में खून के धब्बे मिले थे। खून के दाग छुपाने के लिए आरोपियों ने गोबर से ताजी लिपाई की थी। इसके अलावा नल के हत्थे, घर के पर्दे और कमरे की चौखट पर भी खून के धब्बे पाये गए थे। इसके साथ ही रसोई घर से शव फेंके जाने के स्थान तक भी खून के धब्बे जगह जगह पड़े मिले थे। इन्हें ही न्यायालय ने प्रमुख साख्य मानते हुए सजा सुनाई।

मात्र सात तारीखों में दस गवाहों की गवाही के बाद सुनाया निर्णय
इस जघन्य मामले में न्यायालय ने मात्र सात तारीखों में ही फैसला सुना दिया। घटना के 27 दिन बाद 29 अप्रैल को बहादुरगढ़ थाना प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार ने मामले की चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। इसके बाद अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 10 गवाह पेश किए। साक्ष्य के रूप में पुलिस ने घटना में प्रयुक्त दरांती और अभियुक्तों के खून से सने कपड़े भी पेश किए गए।

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