- मेरठ के शायर अंजुम जमाली की याद में आयोजित की गई नशिस्त
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नववर्ष की पूर्वसंध्या खूबसूरत अशआर और गजलों की बारिश से गुल ओ गुलजार हो गई। रविवार को शहर के मकबूल शायर अंजुम जमाली की याद में नशिस्त का आयोजन किया गया। अदब के अलंबरदारों ने अपनी अलबेली और छलकती शायरी से इस महफिल को सतरंगी बना दिया। इस दौरान दरकते इंसानी रिश्ते और समाजी मसाइल को लफ्जों का अमलीजामा पहनाया गया। साथ ही जाम ओ मीना और महबूब की शायरी ने माहौल में रूमानियत भर दी।
नशिस्त का आयोजन समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी के लिसाड़ी गेट स्थित आवास पर किया गया। इसमें अंजुम जमाली के साथ बिताए गए पल को याद किया गया। हम ख्याल फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के कई शायरों ने हिस्सा लिया। अंजुम जमाली के भी शेर पढ़े गए। इसमें एक शेर था कि सिर्फ फरियाद से इंसाफ नहीं मिल सकता, हमने इस दौर में हक मांगा नहीं छीना है। नशिस्त की निजामत करते हुए शायर इरशाद बेताब ने नये साल की शुरआत से जोड़ते हुए एक शेर पढ़ा...अब उसका मिलना भी ख्वाबों खयाल जैसा है, अभी तो साथ वो माजी भी हाल जैसा है, हजारों दोस्त हैं हमराह पर तेरे बिन अब, ये साल ए नव भी तो गुजरे ही साल जैसा है...। उनके इस शेर पर श्रोता वाह-वाह करने लगे। नजीर मेरठी ने पढ़ा... कमी तो मय की नहीं थी, लेकिन मेरा साकी, किसी को जाम दिया और किसी को भूल गया। वो मेरी जान का दुश्मन था जानता था मैं, मिला जो हश्र में तो मैं दुश्मनी को भूल गया। अदना मेरठी ने पढ़ा की...दुआ सलाम का रस्ता निकालना होगा, जिदों के फूलों पे तेजाब डालना होगा, हमारे और तुम्हारे यही हैं दो दुश्मन, तुम्हें ज़बान हमें दिल संभालना होगा। उन्होंने आगे पढ़ा ...मुझमें भी खौलने की उबलने की है नमू, मैं खून हूं मगर किसी कमजोर नस में हूं। अहले अदब जो लेने लगे हैं मेरा सलाम, मैं आज इस मुकाम पर 64 बरस में हूं। शायर शाहिद चौधरी ने पढ़ा ...अब मेरा जिक्र नहीं उनको पसंद, नागवारी का यह आलम तौबा.. राह में उनकी बिछे जाते हैं, खाकसारी का यह आलम तौबा। इसके अलावा इसरार उल हक किठौरवी, साबिर हटवी, जमशेद माहिर, रजा खतौलवी, मुरसलीन माहिर और साजिद सरधनवी ने अशआर पेश किए।
नशिस्त में अंजुम जमाल के बेटे इंजीनियर रिफत जमाली, आफताब आलम खां, उमरान सिद्दीकी, आफाक अहमद, मुफ्ती अशरफ, जीशान खान, अनीस रईस, अतहर अहमद काजमी , आफाक अहमद , इमरान सिद्दीकी जर्रार एडवोकेट , कौसर नदीम एडवोकेट , मजहर एडवोकेट और सलीम सैफी आदि मौजूद थे।