चतुर्मास असल में संन्यासियों द्वारा समाज को मार्गदर्शन करने का समय है। आम आदमी इन चार महीनों में सिर्फ सत्य बोले तो उसे अपने अंदर आध्यात्मिक प्रकाश नजर आएगा। अब 25 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी को श्रीहरि योग निद्रा से उठेंगे।
चतुर्मास में सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित रहेंगे। इस बार संयोग से देवशयनी और देवोत्थानी एकादशी बुधवार के दिन ही पड़ रही हैं। वहीं अधिमास होने के कारण इस बार चतुर्मास पांच माह के होंगे।
ईश्वर की भक्ति ही उपयुक्त
चतुर्मास में पूरी तरह ईश्वर की भक्ति में डूबे रहें। बदलते मौसम में जब शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बेहद कम होती है, तब आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति के लिए व्रत करना, उपवास रखना और ईश्वर की आराधना करना बेहद लाभदायक माना जाता है। सूर्य चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व भी इन दिनों कम हो जाता है। नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ने लगता है। ऐसे में देव पूजन द्वारा सकारात्मक शक्तियों को जाग्रत रखा जाए।