मेरठ। जल बचाने के लिए नियमों का पालन कराने में सख्ती बरतनी होगी। इस मामले में कई विभाग फेल हैं। सरकार की तरफ से 300 वर्ग मीटर सेअधिक क्षेत्रफल वाले मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने के निर्देश हैं। हालांकि लोकल स्तर पर इन नियमों को लागू कराना विभागों के बस में नहीं है। इसलिए ये भी जल संकट के लिए जिम्मेदार होंगे।
मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से पिछले वर्ष चलाए अभियान में ऐसे भवनों स्वामियों को नोटिस जारी किए गए। हालांकि यह अभियान भी फाइलों तक सिमट कर रह गया। वहीं, नगर निगम करोड़ों रुपये जलकर वसूलता है। वह भी इसके लिए जागरूक नहीं है। ऐसे में जब तक विभाग आगे नहीं आएंगे तब तक जल सरंक्षण संभव नहीं है।
शासन के आदेश की भी अवहेलना
शासन से पहले भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने के लिए निर्देश हैं। हालांकि इस बार शमन योजना-2020 में मानचित्र तभी स्वीकृत किया जाएगा जब शपथ पत्र पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगवाने के लिए लिखकर देना होगा। इसके लिए दो महीने का समय दिया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो शमन रद्द कर दिया जाएगा। एमडीए ने पिछले वर्ष करीब 500 नोटिस जारी करने का दावा किया था। जिन्हें एक सप्ताह के अंदर घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना था। हालांकि इनका बाद में स्थलीय परीक्षण हुआ या नहीं है इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे में जिम्मेदार विभाग और अधिकारी भी जल संकट के लिए जिम्मेदार होंगे।