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EXCLUSIVE: डेंगू न चिकनगुनिया, जानें फिर कैसा रहस्य बना है 'बुखार'

Tue, 23 Oct 2018 03:27 PM IST
अरीश रिज़वी, अमर उजाला, मेरठ
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डेंगू
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डेंगू है न चिकनगुनिया। लेकिन इसके जैसे लक्षणों वाला ‘रहस्यमयी’ बुखार शहर के हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। डॉक्टर डेंगू या चिकनगुनिया के लक्षण पाकर मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजते हैं, मगर जांच में न डेंगू निकलता है और न ही चिकनगुनिया। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की लैब में पिछले दो माह में 1988 सैंपलों को जांच के लिए भेजा गया, जिनमें से 1904 सैंपल नेगेटिव निकले हैं, यानि इनमें डेंगू-चिकनगुनिया की पुष्टि नहीं हुई है। चिकित्सक इस बुखार को वायरल बुखार ही बता रहे हैं। 

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मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल हो या फिर निजी अस्पताल और क्लीनिक, सभी में बुखार के मरीजों की भरमार है। एंटीबायोटिक खाने के बाद तीन से पांच दिन में उतर जाने वाला वायरल बुखार कई मरीजों का एक सप्ताह तक नहीं उतर रहा है। चिकनगुनिया की तरह ही मरीज को हाथों-पैरों में दर्द, बदन दर्द महसूस हो रहा है। डेंगू के मरीजों की तरह बुखार, जोड़ों में दर्द, चक्कर आना, थकान, भूख न लगाना और उल्टियां आती हैं इसके साथ ही जीका वायरस की तरह आंखें लाल भी हो रही हैं। शुगर और हृदय रोगियों के लिए यह ज्यादा घातक सिद्ध हो रहा है।

प्लेटलेट्स की भूमिका
आमतौर पर तंदुरुस्त व्यक्ति के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करती हैं। अगर प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो उसकी वजह डेंगू हो सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि जिसे डेंगू हो, उसकी प्लेटलेट्स नीचे ही जाएं या जिसकी प्लेटलेट्स कम हो रही हैं, उसे डेंगू ही हो। प्लेटलेट्स अगर एक लाख से कम हैं तो मरीज को फौरन चिकित्सक को दिखाना चाहिए। अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। 40 से 50 हजार प्लेटलेट्स तक ब्लीडिंग नहीं होती।
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चिकित्सकों का कहना है कि बुखार एक सप्ताह में पूरी तरह से ठीक हो जाता है और बार-बार नहीं होता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। बुखार में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिसे ठीक होने में थोड़ा समय लगता है, इसी वजह से कई बार पैरों में दर्द और कमजोरी सी महसूस होती है। मौसमी फल, ताजी सब्जियां खाएं। रोक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ जूस, दूध आदि पिएं। शराब और धूम्रपान से दूर रहें। बिना सलाह के दवाइयां न लें।

लैब में जीका वायरस जांचने की किट नहीं
अलर्ट के बावजूद सरकारी अस्पतालों की लैबों में जीका वायरस जांच करने की किट ही मौजूद नहीं है। माइक्रोबायोलॉजी लैब के इंचार्ज डॉ. अमित गर्ग का कहना है कि उनके यहां मशीन है, मगर किट अभी नहीं आई है। एक किट करीब 12 से 15 हजार की आती है, जिसमें 96 सैंपलों की जांच होती है।

बच्चों की सेहत का रखें ज्यादा ध्यान
बच्चों का इम्यून सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है और वे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए उनके प्रति सचेत होने की ज्यादा जरूरत है। पेरेंट्स ध्यान दें कि बच्चे घर से बाहर पूरे कपड़े पहनकर जाएं। जहां खेलते हों वहां आसपास गंदा पानी न जमा हो। स्कूल प्रशासन इस बात का ध्यान रखे कि स्कूलों में मच्छर न पनप पाएं। बहुत छोटे बच्चे खुलकर बीमारी के बारे में बता भी नहीं पाते इसलिए अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो डॉक्टर को दिखाएं।

हजारों तरह के होते हैं वायरस
वायरस हजारों तरह के होते हैं। डेंगू, चिकनगुनिया या जीका तो पता चल गए, मगर ऐसे भी वायरस हैं, जिनका पता नहीं चल सका है। मेरठ में डेंग, चिकनगुनिया के अलावा और किसी वायरस की जांच भी नहीं हो रही हैं। जिनको डेंगू-चिकनगुनिया नहीं निकल रहा है, उनकी सरकारी लैब में जीका वायरस की जांच होनी चाहिए।- डॉ. तनुराज सिरोही, वरिष्ठ फिजिशियन
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95 प्रतिशत सैंपल नेगेटिव
डेंगू, चिकनगुनिया के लक्षणों वालों जिन बुखार के मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं, उनमें से 95 प्रतिशत सैंपल निगेटिव निकल रहे हैं। - डॉ. अमित गर्ग, इंचार्ज, माइक्रोबायोलॉजी लैब मेडिकल कॉलेज

हो सकता है नया वायरस 
यह वायरल बुखार का नया वायरस हो सकता है, जिसका स्ट्रेन डेंगू, चिकनगुनिया से मिलता-जुलता हो सकता है। सावधानी बरतें। -डॉ. विश्वजीत बैंबी, वरिष्ठ फिजिशियन

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