लैब में जीका वायरस जांचने की किट नहीं
अलर्ट के बावजूद सरकारी अस्पतालों की लैबों में जीका वायरस जांच करने की किट ही मौजूद नहीं है। माइक्रोबायोलॉजी लैब के इंचार्ज डॉ. अमित गर्ग का कहना है कि उनके यहां मशीन है, मगर किट अभी नहीं आई है। एक किट करीब 12 से 15 हजार की आती है, जिसमें 96 सैंपलों की जांच होती है।
बच्चों की सेहत का रखें ज्यादा ध्यान
बच्चों का इम्यून सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है और वे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए उनके प्रति सचेत होने की ज्यादा जरूरत है। पेरेंट्स ध्यान दें कि बच्चे घर से बाहर पूरे कपड़े पहनकर जाएं। जहां खेलते हों वहां आसपास गंदा पानी न जमा हो। स्कूल प्रशासन इस बात का ध्यान रखे कि स्कूलों में मच्छर न पनप पाएं। बहुत छोटे बच्चे खुलकर बीमारी के बारे में बता भी नहीं पाते इसलिए अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
हजारों तरह के होते हैं वायरस
वायरस हजारों तरह के होते हैं। डेंगू, चिकनगुनिया या जीका तो पता चल गए, मगर ऐसे भी वायरस हैं, जिनका पता नहीं चल सका है। मेरठ में डेंग, चिकनगुनिया के अलावा और किसी वायरस की जांच भी नहीं हो रही हैं। जिनको डेंगू-चिकनगुनिया नहीं निकल रहा है, उनकी सरकारी लैब में जीका वायरस की जांच होनी चाहिए।- डॉ. तनुराज सिरोही, वरिष्ठ फिजिशियन
95 प्रतिशत सैंपल नेगेटिव
डेंगू, चिकनगुनिया के लक्षणों वालों जिन बुखार के मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं, उनमें से 95 प्रतिशत सैंपल निगेटिव निकल रहे हैं।
- डॉ. अमित गर्ग, इंचार्ज, माइक्रोबायोलॉजी लैब मेडिकल कॉलेज
हो सकता है नया वायरस
यह वायरल बुखार का नया वायरस हो सकता है, जिसका स्ट्रेन डेंगू, चिकनगुनिया से मिलता-जुलता हो सकता है। सावधानी बरतें।
-डॉ. विश्वजीत बैंबी, वरिष्ठ फिजिशियन
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