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दिल्ली के राज्य विवि की परीक्षाएं रद्द, सीसीएसयू का अभी कुछ पता नहीं

Sun, 12 Jul 2020 01:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सीसीएसयू
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दिल्ली के राज्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सेमेस्टर की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। दिल्ली में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया कि छात्रों के स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता है। ऐसे में किसी भी सेमेस्टर की परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी।
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छात्र-छात्राओं को पिछली परीक्षा के अंकों के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। एकतरफ दिल्ली में परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं, वहीं सीसीएसयू के पांच लाख और प्रदेश के 48 लाख छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका है। यहां अभी तक सरकार परीक्षा को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पाई है। छात्र-छात्राएं रोजाना पूछ रहे हैं कि परीक्षाओं का क्या होगा।

सीसीएसयू में दो तरह की परीक्षाएं होती हैं। बीए-बीएससी-बीकॉम में रेग्युलर और बीए-बीकॉम एवं एमए-एमकॉम आदि विषयों में वार्षिक परीक्षाएं होती हैं। ये परीक्षा 22 फरवरी से शुरू हुईं थी। इनमें 3 लाख 70 हजार के करीब छात्र-छात्राएं शामिल हैं। 30 फीसदी परीक्षाएं होने के बाद लॉकडाउन लग गया। जिसके कारण 18 मार्च से आगे की परीक्षाएं स्थगित हो गईं थी।
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ये परीक्षाएं 27 अप्रैल तक खत्म होनी थीं। इसके बाद सेमेस्टर कोर्सों, एमए-एमएससी-एमकॉम रेग्युलर, एलएलबी, एलएलएम, बीबीए, बीसीए, एमबीए-एमसीए समेत 45 कोर्सों एवं बीएड की परीक्षाएं जून में शुरू हो जानी थी। इसमें पौने दो लाख से अधिक छात्र-छात्राएं हैं। ऐसे में विवि पर अब दोनों परीक्षाएं एक साथ कराने का दबाव पड़ रहा है।

फाइनल से भी नहीं बन रही बात
विवि प्रशासन ने पहले फाइनल ईयर की परीक्षाएं कराने का प्लान बनाया, लेकिन यह भी आसान नहीं है। वार्षिक प्रणाली में बीए-बीएससी-बीकॉम में फाइनल ईयर में 83 हजार के करीब छात्र-छात्राएं हैं। एमए-एमकॉम फाइनल प्राइवेट में 26 हजार छात्र-छात्राएं हैं।

सेमेस्टर फाइनल ईयर में एमए-एमकॉम-एमएससी रेग्युलर, एलएलबी फाइनल, एलएलएम फाइनल, बीए-एलएलबी फाइनल, बीएससी-एमएससी एजी फाइनल कोर्सों में 63 हजार के करीब छात्र-छात्राएं हैं। इन सबकी संख्या 1 लाख 72 हजार के करीब है। विवि इनका डमी परीक्षा कार्यक्रम बना चुका है। अगर रविवार में भी परीक्षाएं कराएंगे तो भी एक महीना लग जाएगा।

आखिर क्यों नहीं लिया जा रहा निर्णय
प्रदेश सरकार ने परीक्षा को लेकर सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में चार कुलपति की समिति गठित की थी। 20 जून को समिति ने शासन को रिपोर्ट दे दी थी। समिति ने परीक्षाएं रद्द कराने की सिफारिश करते हुए प्रोन्नति का फॉर्मूला दिया था।
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इस पर कुछ फैसला होता कि यूजीसी ने निर्देश जारी कर दिए कि फाइनल ईयर की परीक्षाएं जरूरी हैं। जिस तरह से कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखकर दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया है, वैसे ही उत्तर प्रदेश सरकार को जल्द निर्णय लेना होगा। क्योंकि यूजीसी के मुताबिक अगर सितंबर में परीक्षाएं कराई गईं तो पीजी का सत्र तो जीरो होने के कगार पर पहुंच जाएगा।

यहां भी हुई ऑनलाइन पढ़ाई में खानापूर्ति
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने यह भी कहा कि जब सेमेस्टर की पढ़ाई नहीं हुई तो परीक्षाएं कैसे लेंगे। यही हाल यहां का भी है। सीसीएसयू कैंपस को छोड़ दें तो अधिकतर कॉलेजों ने ऑनलाइन पढ़ाई की सिर्फ रस्म अदायगी की है।

सभी कॉलेजों से कहा गया था कि क्या पढ़ाया है, हर शिक्षक के नाम से छात्रों का फीडबैक फार्म भी अपलोड करें लेकिन आज तक नहीं हुआ। इससे साफ है कि यहां पर कितनी पढ़ाई हुई है। सीसीएसयू में अधिकतर छात्र-छात्राएं ग्रामीण इलाकों से आते हैं, ऐसे में वहां पर ऑनलाइन पढ़ाई संभव ही नहीं थी। छात्रों का कहना है, ऐसे में यहां भी जब पढ़ाई नहीं हुई तो पेपर क्यों करा रहे हैं।
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