एनएचएआई से लेकर जिला प्रशासन के अफसर किसानों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। निजी नलकूप लगाने के लिए ढाई लाख रुपये तक खर्चा आता है। अफसोस की बात है कि एनएचएआई ओर जिला प्रशासन नलकूप का मुआवजा 25 से लेकर 30 हजार रुपये दे रहे हैं। चकरोड, नाली, बंजर भूमि, बागों के पेड़ का कम मुआवजा न दिया जाए। एनएचएआई और जिला प्रशासन के अफसर किसानों के साथ मिल-बैठकर मुआवजे का समाधान करें।
धरने पर पहुंचे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के सक्षम अधिकारी एसडीएम सदर बृजेश कुमार सिंह किसानों के बीच में बैठ गए। चौधरी नरेश टिकैत ने एसडीएम से पूूरे मामले की जानकारी ली। एसडीएम ने बताया कि जो बात किसानों के साथ तय हुई थी, उसी के तहत प्रशासन काम का कर रहा है। इस मौके पर बहावडी के थांबेदार श्याम सिंह मलिक ने कहा कि जब तक खड़ी फसल का मुआवजा, पैमाइश में छूटे हुए पेड़ और नलकूप का उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक किसान निर्माण शुरू नहीं करने देंगे।
एसडीएम ने भाकियू अध्यक्ष और सभी खाप चौधरियों को विश्वास दिलाया कि एसडीएम या तहसीलदार के बिना भूमि पर कब्जा नहीं लिया जाएगा। समिति के अध्यक्ष ठाकुर वीर सिंह की ओर से एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपा। जिसमें 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया। डीएम से मुलाकात कर किसानों की समस्याओं के निस्तारण की मांग की गई। डीएम ने समस्याओं के जल्द समाधान का आश्वासन दिया।