इसके बाद धीरे-धीरे इस क्षेत्र में मायावती का राजनीतिक ग्राफ और बहुजन समाज पार्टी का जमीनी आधार बढ़ता गया। वह चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने मात्र 19 सीटें हासिल की थीं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा का प्रदर्शन 2007 के मुकाबले काफी खराब रहा।
1989 में बसपा को तीन सीट मिली थीं और 2009 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर 21 सीट पर जीतीं थीं, लेकिन 2024 के मौजूदा लोकसभा चुनाव में बसपा शून्य पर सिमट गई। इतनी बड़ी पार्टी का जनाधार खिसकता चला गया।
चंद्रशेखर ने भीम आर्मी का गठन किया और इसके बाद मार्च 2020 में आजाद समाज पार्टी की घोषणा की। बाबा साहब के मिशन को आगे ले जाने और दलितों, वंचितों, शोषितों की आवाज बनने का भरोसा दिलाते हुए राजनीति शुरू की। उन्होंने मायावती को बड़ी नेता बताकर खुद को उनके बाद का दलित नेता तक सोशल मीडिया पर करार दिया था। युवाओं के साथ समाज में चंद्रशेखर की लोकप्रियता लगातार बढ़ने लगी।
मायावती की जोर आजमाइश रही नाकाम
चंद्रशेखर की बढ़ती लोकप्रियता के मद्देनजर बसपा सुप्रीमो मायावती ने नगीना पर फोकस किया। उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को स्टार प्रचार के रूप में नगीना भेजा। आकाश ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत नगीना से ही की थी। मायावती ने खुद भी बिजनौर जिले में सभाएं कर चंद्रशेखर का नाम लिए बगैर तमाम निशाने साधे, लेकिन सब चूक गए और चंद्रशेखर के मुकुट में नगीना सज गया।
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बसपा
साल सीट वोट प्रतिशत
1989 3 2.1
1991-92 3 1.8
1996 11 4.0
1998 5 4.7
1999 14 4.2
2004 19 5.3
2009 21 6.2
2014 0 4.2
2019 10 3.7