टिकट को लेकर लंबी खींचतान रही। टिकट के दावेदारों में सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान और शहर विधायक रफीक अंसारी भी थे। सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भानु प्रताप सिंह का टिकट फाइनल हुआ। उन्होंने प्रचार भी किया, लेकिन इसके बाद भी टिकट को लेकर जोर आजमाइश होती रही। फिर अतुल प्रधान का टिकट तय कर दिया गया। उन्होंने नामांकन भी कर दिया, लेकिन अगले ही दिन उनका टिकट काट दिया गया और सुनीता वर्मा को नामांकन से एक दिन पहले रात में टिकट दे दिया गया। इसके बाद अतुल प्रधान ने टिकट न होने पर नाराजगी जताई। हालांकि, बाद में वह बैकफुट पर आ गए और टिकट का समर्थन किया। योगेश वर्मा सुबह लखनऊ से हेलिकॉप्टर से हिंडन गाजियाबाद और फिर कार से मेरठ आए और नामांकन किया।
टिकट को लेकर सपा में खींचतान इतनी थी कि सुनीता वर्मा और अतुल प्रधान के अलावा पांच और दावेदारों ने नामांकन पत्र लिए थे। सुनीता वर्मा को शहर विधायक रफीक अंसारी और किठौर विधायक व पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर ने मजबूती से चुनाव लड़ाया, लेकिन अतुल प्रधान प्रचार में ज्यादा नजर नहीं आए। योगेश वर्मा ने हार के बाद किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन अपनी ही पार्टी से जुड़े एक नेता पर टिप्पणी की, जो गुटबाजी की तरफ इशारा करती है।