महापंचायत करने पहुंचे लोगों को हिरासत में लेकर थाने ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
एसपी देहात ने निर्देश दिए कि देहात और हाईवे से महापंचायत के लिए कोई भी ट्रैक्टर ट्राली किसी भी कीमत पर शहर में नहीं आने दी जाए। जिसके बाद पुलिस ने मोदीपुरम, मवाना रोड, इंचौली, कंकरखेड़ा में दर्जनों ट्रैक्टरों को रोककर वापस कर दिया। इंस्पेक्टर सिविल लाइन नीरज मलिक ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी छह लोगों को निजी मुचलके पर थाने से छोड़ दिया गया। वहीं बताया गया कि महापंचायत में भीम आर्मी की टीम को भी आना था, लेकिन वो नहीं आई।
रोहित की हत्या करने का था आरोप
गंगानगर क्षेत्र के उल्देपुर गांव में नौ अगस्त को दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था। इसमें दलित समाज के रोहित की मौत हो गई थी। आरोप था कि सवर्ण समाज के लोगों ने रोहित की हत्या की थी। बाद में पुलिस फोर्स ने दलित समाज के लोगों पर लाठीचार्ज कर शव को जबरन पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पुलिस ने रोहित पक्ष पर भी केस किया था। इसी को लेकर दलित आंदोलन कर रहे हैं।
पुलिस को याद आया 2 अप्रैल
एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के फैसले के विरोध में दो अप्रैल को हजारों की संख्या में लोगों ने जमकर बवाल काटा था। ऐसे में दलित समाज की महापंचायत को रोकने को लेकर पुलिस ने पूरी प्लानिंग की थी। बृहस्पतिवार दोपहर तक एसएसपी का चार्ज एसपी देहात राजेश कुमार पर था। एसपी देहात ने सभी थाना प्रभारियों से कहा था कि यदि महापंचायत में भीड़ जुटी तो सख्त कार्रवाई होगी। एसपी देहात ने युवक के पिता देवेंद्र सिंह से भी बात की थी कि वह पंचायत न करें। वहीं देवेंद्र ने कहा कि उनके पास पंचायत के लिए परमिशन थी, लेकिन पुलिस ने परमिशन फाड़ते हुए जेल भेजने की धमकी दी।
मुकदमा वापस करने सहित अन्य मांग रहीं
रोहित के पिता देवेंद्र ने मांग की कि उनके पक्ष पर दर्ज किया गया मुकदमा वापस हो। अभी पांच नामजद आरोपी फरार चल रहे हैं उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले सीओ का ट्रांसफर हो। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और शासन से आर्थिक सहायता दिलाई जाए। 20 अगस्त को एसपी देहात राजेश कुमार ने छात्र के पिता देवेंद्र से मिलकर सभी मांगे पूरी कराने का आश्वासन दिया था।
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