पाक जासूस मोहम्मद इजाज भारत में आईएसआई के कमजोर पड़ चुके नेटवर्क को मजबूत बनाने आया था। लगातार हो रही गहन पूछताछ में सामने आ रहा है कि इजाज करीब पांच साल से देश के कई हिस्सों में रहकर आईएसआई की जड़ें मजबूत करने में जुटा था। देश की सुरक्षा को कमजोर करने के लगातार रच रहे चक्रव्यूह में वह 44 से ज्यादा लोगों से संपर्क बना चुका था। इनमें से 15 लोग ऐसे हैं जो पहले से आईएसआई के लिए बतौर एजेंट या कैरियर के रूप में काम कर रहे थे।
दरअसल जाहिर तौर पर भले ही खुफिया एजेंसियों के अफसर खुलकर बताने से कुछ बच रहे हों, लेकिन इजाज से पुलिस रिमांड और उसके कोलकाता में पकड़े गए साथियों से हो रही पूछताछ में आईएसआई के नापाक मंसूबों की कलई खुल रही है। अब जो ताजा जानकारी सामने आ रही हैं उसके अनुसार इस्लामाबाद पाकिस्तान निवासी मोहम्मद इजाज कोई साधारण भेदिया नहीं, बल्कि आईएसआई का भरोसेमंद अफसर माना जा रहा है।
जिसे पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारतीय सेनाओं के सुरक्षा चक्रव्यूह को भेदने के लिए भेजा था। इसके साथ ही उस पर ऐसे देशद्रोहियों को भी तैयार करने की जिम्मेदारी थी, जो सेना और देश से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं को उस तक पहुंचा सकें। इसके अलावा इजाज के लिए उन एजेंटों को सक्रिय करते हुए सहयोग देना था, जो भारत में रहकर पहले से आईएसआई के लिए काम कर रहे हैं।
लोकल जासूस करने थे तैयार
इजाज से पूछताछ में खुलासा हुआ कि उस पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नए लोकल जासूस खड़े करने की जिम्मेदारी भी थी। इन जासूसों का सीधे आईएसआई से कोई लिंक नहीं था, लेकिन वे इजाज के जरिये आईएसआई को सेना और देश से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराते थे। इजाज की मानें तो भारत भेजते समय उसे ऐसे एजेंटों की सूची भी दी गई थी, जो पहले से देश में सक्रिय हैं। इनसे अलग वह अभी तक ऐसे 44 लोगों को इसके लिए तैयार कर चुका था। इनमें से 15 लोग ऐसे बताए गए, जो पहले से आईएसआई के लिए काम करते रहे, लेकिन खुफिया एजेंसियों की लगातार घेराबंदी से पीछे हटना शुरू हो गए थे। इजाज ने ऐसे एजेंटों को फिर से एक्टिव किया।
यह थी आईएसआई की छटपटाहट
भारतीय सेनाओं की गोपनीय जानकारियां और उनके मूवमेंट जानने के लिए आईएसआई पहले से लोकल जासूस तैयार करता रहा है। लेकिन देश की खुफिया एजेंसियों की सक्रियता से कई जासूस मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, पंजाब, बिजनौर और रुड़की समेत कई जिलों में पकड़े गए। उनकी गिरफ्तारी होने से पाकिस्तान में बैठे आईएसआई अफसर छटपटाने लगे। इसके लिए ही आईएसआई ने इजाज जैसे कई जासूस भारत में अलग-अलग प्रदेशों में भेजे थे। ताकि भारत की जासूसी का सिलसिला बदस्तूर जारी रहे।
बैकग्राउंड से शक हो रहा पुख्ता
अभी तक खुफिया एजेंसियों और पुलिस के अफसर इजाज को सामान्य जासूस मानकर चल रहे थे। लेकिन इजाज के पाकिस्तान की नौकरशाही और नामी हस्तियों से संपर्क सामने आने पर उसे आईएसआई का अफसर माना जा रहा है।
वेस्ट यूपी पर फोकस
आतंकी गतिविधियों के प्लेटफार्म माने जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आईएसआई का गहरा लिंक रहा है। इजाज देश के कई हिस्सो में घूमने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही रहकर भारतीय सुरक्षा को खोखला करने में लगा था। आईएसआई ने उसे मिशन पूरा करने के लिए पुराने जासूसों को जोड़ने का काम भी दिया था। बड़ा संगठन बनाकर आईएसआई वेस्ट में अपना नेटवर्क मजबूत रखना चाहती है।
मेरठ के जासूसों से संपर्क
पूछताछ में इजाज ने बताया कि वर्ष 2007 में नासिर निवासी सदर बाजार को एटीएस ने पकड़ा था। जो सेना की गोपनीय सूचनाएं आईएसआई को भेजता था। नासिर अभी जेल से बाहर है। पूर्वा फैयाज अली, देहली गेट निवासी आसिफ भी आईएसआई का गुर्गा था जिसे एक साल पहले एसटीएफ ने दबोचा था। उसकी निशानदेही पर सेना का जवान भी पकड़ा गया था। कोतवाली के शाहपीर गेट निवासी आबिद को भी एसटीएफ ने चार साल पहले रुड़की कैंट एरिया में पकड़ा था। एसटीएफ मेरठ से उसका पीछा करते हुए रुड़की तक पहुंची थी। उसके पास से छावनी के नक्शे और वीडियो समेत कई गोपनीय दस्तावेज मिले थे। इसके अलावा कोलकाता, बरेली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, पंजाब और बिजनौर में भी आईएसआई के पुराने एजेंटों से इजाज संपर्क में था।