मेरठ में चिकित्सकों, स्टाफ और कर्मचारियों समेत 22 लोगों को परिवार से दूर 14 दिन के लिए एक होटल में क्वारंटीन कर दिया गया है। खास बात यह है कि चिकित्सकों और स्टाफ के हौसले बुलंद हैं और वे जोश से भरे हुए हैं। 14 दिन के बाद उन्हें फिर से कोरोना के मरीजों के इलाज में जुटना होगा। हालांकि इस पूरी टीम में तीन ऐसी स्टाफ नर्स हैं जिनके छोटे बच्चे हैं। जब अमर उजाला के संवाददाता ने इनसे बात की तो इनकी आंखें नम हो गई। इनका कहना है कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद ही बच्चों से मिलेंगी।
अमर उजाला के संवाददाता ने सबसे पहले नर्स अनीता यादव से बात की तो उन्होंने बताया कि वह 16 दिन से अपने पांच साल के बेटे से दूर हैं। उन्होंने बताया कि वह कभी भी अपने बच्चे से एक पल के लिए दूर नहीं हुई। इस दौरान उनकी आंखें नम हो गई। उन्होंने बताया कि बेटा गांव में अपनी दादी के पास है। अब वह एक माह बाद ही अपने बच्चे से मिलेंगी।
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इसके बाद हमारे संवाददाता ने नर्स सविता और कविता से भी बात की। उन्होंने बताया कि वे अपने बच्चों से दूर हैं। उनका कहना है कि दूर रहकर बच्चों की याद तो बहुत आती है लेकिन जिम्मेदारी भी जरूरी है। कविता के छह साल का बच्चा है जबकि सविता के 11 साल का बच्चा है। दोनों का कहना है कि अब वे क्वारंटीन से बाहर निकलने के बाद ही अपने बच्चों से मिल सकेंगी।
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