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गड़बड़झालों में उलझी गंगा पुल की मेरठ से कनेक्टिविटी

Sat, 01 Jun 2019 03:52 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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गंगापुल - फोटो : अमर उजाला
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 मेरठ और बिजनौर को जोड़ने के लिए भीकुंड चेतावाला में गंगा नदी पर बन रहे पुल की कनेक्टिविटी गड़बड़झालों में फंसकर रह गई है। आरोप है कि जो रकम सरकार ने मंजूर की, उससे ज्यादा ठेकेदार ने खर्च कर दी और काम अभी अधूरा है। एप्रोच रोड पर मिट्टी डालने में भी खेल की बात कही जा रही है। पूरे प्रकरण पर जहां सीएम स्तर से जांच के निर्देश दिए गए हैं। वहीं आयुक्त स्तर से भी विस्तृत जांच करने को कहा गया है।
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चेतावाला घाट में बन रहे इस पुल के निर्माण का ठेका वर्मा कंस्ट्रक्शन को मिला था। शक्तिप्रकाश वर्मा द्वारा की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस निर्माण में गड़बड़झाला किया गया है। एप्रोच रोड बनाने का अनुबंध तीन करोड़ 36 लाख 580 रुपये का था, लेकिन अब तक भुगतान तीन करोड़ 51 लाख रुपये का किया जा चुका है। हैरत यह है कि अब भी यहां काम अधूरा पड़ा है। इतना ही नहीं, यहां काम में नुकसान और मिट्टी बह जाने का फर्जीवाड़ा कर ठेकेदार ने साठ लाख रुपये इंश्योरेंस के अलग से प्राप्त कर लिए हैं।

आरटीआई में खुल रहा खेल
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में भी खेल पुष्ट होता नजर आ रहा है। ठेकेदार की ओर से दावा किया गया कि बाढ़ जैसी स्थिति होने के कारण एप्रोच रोड की मिट्टी बह गई, लेकिन प्रशासन ने इस अवधि में यह जवाब दिया कि बाढ़ जैसे हालात थे ही नहीं। ऐसे में मिट्टी बहने के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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विभागों की मिलीभगत आ रही सामने
इस पूरे मामले में विभागों की मिलीभगत सामने आ रही है। गंगा की दूसरी तरफ बिजनौर में जहां काम ठीक तरह से हो रहा है तो वहीं मेरठ में काम अधूरा पड़ा है। लोक निर्माण विभाग एप्रोच रोड पर मिट्टी डालने के लिए दस लाख रुपये से ज्यादा रॉयल्टी जमा करने की बात कह रहा है। इस खनन की अनुमति कहां से मिली, इसका कोई अता पता नहीं है।
अब जांच में खुलेंगे राज
शासन के आदेश पर इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। शासन के अलावा आयुक्त स्तर पर भी जांच कराई जा रही है। अहम बात यह है कि गड़बड़झालों ने यहां कनेक्टिविटी की राह कुंद कर दी है। पिछले मानसून में मिट्टी बह जाने की बात कही जा रही है। अब फिर से मानसून आने वाला है और काम अभी जस का तस ही है। उधर वर्मा कंस्ट्रक्शन के निदेशक ओमपाल वर्मा का कहना है कि कोई गड़बड़झाला नहीं हुआ है। जितना  पैसा लिया गया है, उसका काम किया गया है। काम इसलिए रुका क्योंकि वन विभाग की लंबे समय बाद एनओसी मिली। इसके अलावा मिट्टी वास्तव में बह गई थी। इसका बाकायदा सर्वे भी हुआ था।
समय पर पूरे होने चाहिए सभी प्रोजेक्ट
सभी प्रोजेक्टों पर समय से पूरा होना चाहिए। चेतावाला पुल का निर्माण पूरा न होने के क्या कारण है, क्या गड़बड़ी है, इसकी पूरी जांच कराई जाएगी।              -अनीता सी मेश्राम, आयुक्त
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