समय के साथ-साथ चुनाव के तौर-तरीकों में भी बड़े बदलाव देखे गए हैं। पूर्व के चुनावों में चौपालों पर लोगों के विचार जानने के लिए हाथ उठवाया जाता था। जिस उम्मीदवार के पक्ष में सर्वाधिक हाथ उठते थे, उसी के पक्ष में सभी मतदान करते थे।
उस समय संसाधन कम थे पर चुनौती बड़ी थी। न ऊंचे मंच थे और न ही लाउडस्पीकर की उचित सुविधा। तब वोटों के लिए प्रत्याशी खेत-खलिहानों तक पैदल ही जाते थे। खेतों में काम कर रहे किसानों से बातचीत करते थे। साइकिलों से भी चुनाव का प्रचार होता था।