इनके अलावा इनसे छोटे स्तर पर भी ऐसे ही कई गुट और हैं। ये छोटे गुट भी अलग-अलग ही रहते हैं। कभी साथ मंच साझा नहीं करते। पार्टी को जिले में मजबूत बनाने में यह गुटबाजी कहीं न कहीं नुकसानदेह साबित हो सकती है।
जिला पंचायत और फिर ब्लॉक प्रमुख चुनाव में यह जाहिर हो चुका है। इसकी भनक सपा के आलाकमान को है। हार के कारणों की राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट भेज दी गई है, सूत्रों की मानें तो उस रिपोर्ट में भी गुटबाजी को साफ तौर पर लिखा गया है।
जिलाध्यक्ष को लेकर भी पिछले साल खूब रस्साकशी चली थी। हालांकि फिर से पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह पर ही भरोसा जताया गया था। उनके लिए असली चुनौती अब है। आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के सभी धड़ों को एकसूत्र में बांधना होगा।
सब साथ होंगे
सभी सपाई भाजपा की जन विरोधी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। अलग-अलग विरोध हो रहा है, लेकिन सभी पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। अलग-अलग ही सही, लेकिन पार्टी को मजबूत कर रहे हैं। सपा को जिताने के लिए सब एक साथ होंगे। -राजपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, सपा