रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के साथ गठबंधन करके अपनी ताकत के साथ ही दायरा भी बढ़ा लिया है। उन्होंने बड़े निर्णय लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों के साथ ही पार्टी नेताओं को भी चौंका दिया है। जयंत ने अपने परिवार की पारंपरिक बागपत लोकसभा सीट को छोड़ कर एक साधारण कार्यकर्ता डॉ. राजकुमार सांगवान को प्रत्याशी बना कर बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने टिकटों के बंटवारे में जाट समाज के डॉ. सांगवान को बागपत और गुर्जर समाज के विधायक चंदन चौहान को बिजनौर से प्रत्याशी बनाया।
एमएलसी के लिए योगेश नौहवार को टिकट देकर ब्रज के नाराज कार्यकर्ताओं और जाट समाज को मना लिया। जाट और गुर्जर को साधने के बाद उन्होंने विधायक अनिल को अचानक मंत्री बना कर अनुसूचित समाज को भी साधने का काम किया है।
जयंत चाहते तो जाट समाज के ही चारों विधायकों में से किसी को भी मंत्री बना सकते थे। सबसे वरिष्ठ विधायक राजपाल बालियान का नाम तय भी हो चुका था, उन्हें दो दिन पहले लखनऊ पहुंचने का संदेश भी मिल चुका था। मगर ऐन वक्त पर जयंत सिंह ने पुरकाजी विधायक अनिल को मंत्री बना कर अनुसूचित समाज के लिए भी बड़ा संदेश दिया। मंत्री बने अनिल का राजनीतिक सफर बसपा से शुरू हुआ था। सहारनपुर के तहारपुर निवासी अनिल ने चरथावल और पुरकाजी से तीन बार विधायक बने हैं। दोनों ही जनपदों में अनुसूचित समाज के लोगों में उनकी अच्छी पैठ है।
चारों सदन का प्रतिनिधित्व करने में जुटा रालोद
राष्ट्रीय लोकदल लोकतंत्र के चारों सदनों में प्रतिनिधित्व करने की कवायद में लगा है। जिसमें वह सफल होता भी नजर आ रहा है। चौधरी जयंत सिंह खुद राज्यसभा के सदस्य है। विधानसभा में उनके नौ विधायक हैं। लोकसभा में प्रतिनिधित्व करने के लिए बागपत और बिजनौर से दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में प्रतिनिधित्व के लिए योगेश नौहवार को प्रत्याशी बनाया है।
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