प्रोफेसर का दावा है कि सिनैप्स की जगह लगने वाली डिवाइस पर अमेरिका, जापान समेत कई देश के वैज्ञानिक जुटे हैं, वहीं उन्होंने भी शोध शुरू किया था। शोध में सिनैप्स की जगह लगने वाली ‘साइनोटिक मेमोरी डिवाइस’ बना ली गई है। यह डिवाइस जैसे ही किसी इंसान के शरीर में लगाई जाती है, वैसे ही उसके अंदर होने वाले केमिकल बदलाव का संदेश मिलने लगता है।
डिवाइस लगाने के बाद मन-मस्तिष्क में आने वाले सकारात्मक-नकारात्मक, झूठ-सच, गुस्सा-प्यार, सोच-विचार और चिंतन आदि के संदेश मिलते हैं। यही नहीं, यदि कोई डिवाइस अपने घर के दरवाजे पर लगता है, तो उसमें गलत मंसूबे पालने वाला व्यक्ति प्रवेश करेगा तो पता चल जाएगा।
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प्रो. संजीव ने बताया कि यह शोध विश्व के वैज्ञानिकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। उन्होंने दावा किया है कि मटेरियल्स टुडे जर्नल में 24.2 इंपैक्ट फैक्टर मिले हैं, जो सीसीएसयू में किसी को नहीं मिले हैं।
नहीं पड़ेगी नार्कों और पॉलीग्राफ टेस्ट की जरूरत
प्रो. संजीव ने बताया कि ‘साइनोटिक मेमोरी डिवाइस’ नामक उपकरण जैसे ही किसी इंसान के संपर्क में आती है, वैसे ही उसके अंदर होने वाले केमिकल चेंज को पढ़ना शुरू कर देती है। यह भी संकेत देती है कि उसके मन में किस तरह का विचार आ रहा है। इससे अब पुलिस को किसी भी अपराधी से सच जानने के लिए थर्ड डिग्री, नार्कों व पॉलीग्राफ टेस्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को देगी बढ़ावा
प्रो. संजीव ने बताया ‘साइनोटिक मेमोरी डिवाइस’ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में बेहतरीन काम करेगी। फिलहाल इसको इंटरनेट से जोड़कर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर भी काम किया जा रहा है।