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CCSU: सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों के शिक्षकों-कर्मचारियों की न्यूनतम 21600 तय सैलरी, शासन ने मांगा था रिकॉर्ड

Sun, 03 May 2020 05:39 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सीसीएसयू फाइल फोटो
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध मेरठ और सहारनपुर जिलों के कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों के शिक्षक-शिक्षिकाओं-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिल गया है। अब तक जहां सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में शिक्षकों की कोई सैलरी तय नहीं थी वहीं, अब सभी को समान सैलरी देनी होगी।
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शनिवार को सीसीएसयू में हुई कार्यपरिषद की ऑनलाइन बैठक में पाठ्यक्रमों के हिसाब से सैलरी के तीन सेगमेंट बनाए गए हैं। इनमें कुछ पाठ्यक्रमों में 21600 तो कुछ में 35 और कुछ में 45 हजार रुपये महीना न्यूनतम सैलरी देनी होगी। सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के साथ ही एडेड कॉलेजों में चल रहे सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों में भी यह नियम लागू होगा। मेरठ और सहारनपुर मंडल के नौ जिलों में एक हजार से ज्यादा कॉलेजों के हजारों शिक्षकों पर इसका असर पड़ेगा।

कुलपति प्रो. एनके तनेता की अध्यक्षता में शनिवार को कैंपस में ऑनलाइन कार्यपरिषद की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें सीसीएसयू से संबद्घ सभी एडेड और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों के कोर्सों के शिक्षकों-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की समान सैलरी समिति द्वारा तय किए जाने के बाद उस पर मुहर लगाई गई।
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शिक्षकों के वेतन के साथ ही अवकाश को लेकर भी सीसीएसयू के नियमों के हिसाब से अनुबंध पत्र कॉलेज के साथ विवि में भी जमा कराया जाएगा। निर्णय लिया गया कि पाठ्यक्रम में छात्रों के शिक्षण शुल्क से प्राप्त होने वाली आय का कम से कम 75 फीसदी अंश उस पाठ्यक्रम विशेष के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियो को देय वेतन आदि पर खर्च किया जाएगा। शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को देय अधिकतम वेतन उस पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित शिक्षण शुल्क तथा सीटों की संख्या पर निर्भर करेगा।

आय का 75 फीसदी खर्च करना होगा वेतन आदि पर  
इस संबंध में कॉलेजों को हर साल ऑडिट कराकर इसका विशेष उल्लेख करना होगा कि आय का 75 फीसदी अंश शिक्षकों-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन आदि पर खर्च किया जा रहा है। इन सभी कॉलेजों में शिक्षकों-कर्मचारियों की सैलरी ऑनलाइन उनके बैंक अकाउंट में जमा करनी होगी। ऑडिट में इसका भी पूरा ब्यौरा दिया जाएगा। 

बिना कुलपति के अनुमोदन के नहीं निकाल सकते 
पाठ्ययक्रम के चलते रहने की स्थिति में शिक्षकों-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवाएं चलती रहेंगी। अगर कोई किसी शिक्षक को नौकरी से निकालता है तो पहले कुलपति का अनुमोदन प्राप्त करना जरूरी होगा। इसके साथ ही शिक्षकों-कर्मचारियों के आकस्मिक अवकाश, प्रसूति अवकाश, कर्तव्य अवकाश तथा अन्य अवकाश विवि द्वारा निर्धारित मानकों के दिए जाएंगे। 

परीक्षा आदि से जुड़े कार्य ही करेंगे
शिक्षकों से परीक्षा संबंधी कार्य कराया जा सकता है। शिक्षकों को रिफ्रेशर-ओरिएंटेशन, वर्कशॉप, सेमिनार एवं कांफ्रेंस में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा शिक्षकों से दूसरा कार्य नहीं लिया जा सकता है। बता दें कि इन कॉलेजों में शिक्षकों-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की संख्या 15 हजार से अधिक है। सभी कॉलेजों में स्टाफ की संख्या के बारे में पोर्टल पर जानकारी मांगी गई है।

ईमानदारी से सैलरी पर हुआ अमल तो कई जगह कोर्स भी होंगे बंद 
सीसीएसयू से संबद्घ कॉलेजों में चल रहे सेल्फ फाइनेंस कोर्सों में शिक्षकों को सैलरी दिए जाने पर ईमानदारी से अमल हुआ तो तमाम जगहों पर कितने ही पाठ्यक्रम भी बंद हो जाएंगे। शासन ने भी स्पष्ट कहा है कि सैलरी नहीं दे सकते हैं तो पाठ्यक्रम बंद कर दें। ऐसे में इसकी मानीटरिंग और ऑडिट पर अधिकारियों का विशेष जोर रहेगा। इसके साथ ही बहुत से कॉलेजों में एक-एक शिक्षक का अनुुमोदन कई जगहों पर है।

अभी तक विवि के पास यह डाटा भी पूरा नहीं है कि टोटल इन कोर्सों में कितने शिक्षक कार्यरत हैं। ऐसे में ऑनलाइन पोर्टल पर पहली बार डाटा मांगे जाने से स्थिति स्पष्ट होगी। इसके साथ ही यह मानीटरिंग करना भी चुनौती होगी कि जो सैलरी अकाउंट में दी जा रही है, वह सही है।

बहरहाल, सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों में पढ़ा रहे शिक्षकों का कहना है कि यह एक अच्छा निर्णय है। अभी तक कोई सैलरी निर्धारित नहीं थी, जिसके चलते चहेतों को ही इसका लाभ मिलता था। अब सही मानीटरिंग हुई तो सबको समान सैलरी देनी ही होगी। 

ये रहे कार्यपरिषद की बैठक में शामिल 
कुलपति प्रो. एनके तनेजा, प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा, वित्त नियंत्रक सुशील कुमार गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अश्वनी कुमार, प्रो. दर्शन लाल अरोड़ा, डॉ. हरेश प्रताप सिंह, प्रो. नवीन चंद लोहनी, प्रो. बीरपाल समेत 19 सदस्य मौजूद रहे। 
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इन पाठ्यक्रमों में न्यूनतम सैलरी -21600 

बीए-सात विषय, बीए ऑनर्स हिंदी-अर्थशास्त्र, एमफए, एमपीए, बीएलआईएससी, एमएलआईएससी, एमए सोशोलॉजी, इतिहास, एमएसडब्लू, सर्टिफिकेट इन लैंग्वेज, डिप्लोमा इन लैंगवेज, एडवांस डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग, पीजी डिप्लोमा इन योगा, पीजी डिप्लोमा इन साइकोलॉजी काउंसिलिंग, डिप्लोमा इन हिंदी अनुवाद, एमफिल जेएमसी, बीकॉम, एमकॉम, एमकॉम सीबीएस, बीएससी, बीएससी ज्वैलरी डिजाइनिंग, बीएससी फिजिकल एजुकेशन, एमएससी मैथ, एमएएसी एजी, बीएससी एजी, एमएससी एजी फूड साइंस। 
इन पाठ्यक्रमों में न्यूनतम सैलरी -35000

बीबीए, बीकॉम ऑनर्स, एमबीए, एमबीए एचए, एलएलबी पांच वर्षीय, एलएलबी तीन वर्षीय, बीकॉम-एलएलबी, एलएलएम, बीसीए, बीएससी बायोटेक, माइक्रोबायलॉजी, कंप्यूटर साइंस, केमेस्ट्री ऑनर्स, माइक्रो ऑनर्स, होम साइंस एवं बीएससी ऑनर्स कंप्यूटर साइंस, एमसीए, एमएससी कंप्यूटर साइंस, बीवॉक आईटी, एमएससी बायोटेक्नोलॉजी, एमएससी माइक्रो, बायोइनफार्मेकटक्स, बायोकेमेस्ट्री, फूड माइक्रोसेफ्टी, बीएफए, एमपीईएस, बीपीईएस, बीजेएमसी, एमफिल एजुकेशन, एमएड, बीएड, बीए-बीएड, बीएलएड, एमफिल फिजिकल एजुकेशन, बीपीईएड-एमपीईएड।

इन पाठ्यक्रमों में है न्यनूतम सैलरी 45 हजार 
बीटेक, एमटेक इंटीग्रेटिड, बीटेक ईसी, एमटेक इंटीग्रेटिड-बीटेक बायोटेक इसके अलावा मेडिकल साइंस के पाठ्यक्रमों बीएससी नर्सिंग, बीपीटी, बीडीएस, एमबीबीएस, एमएस-एमडी, बीयूएमएस आदि 21 पाठ्यकम्रों में 35 हजार और 45 हजार रुपये प्रति महीना न्यूनतम सैलरी रहेगी। 

ये है मामला 
प्रदेश के एक सेल्फ फाइनेंस कॉलेज के एक शिक्षक ने कॉलेजों में शिक्षकों की सैलरी में भारी विषमता की शिकायत करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा कि कॉलेजों में पाठ्यक्रमों के हिसाब से सैलरी कितनी निर्धारित है। इसको लेकर सरकार कोई जवाब नहीं दे पाई। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार से हर विवि में सेल्फ फाइनेंस के शिक्षकों की सैलरी तय करने को कहा। जिसके बाद विवि ने समिति बनाकर हर पाठ्यक्रम में समान सैलरी निर्धारित की है।
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