तीन बार मिली इंस्पेक्टर की शिकायत
एसएसपी ने भ्रष्टाचार को लेकर पहली क्राइम मीटिंग में सभी थानेदारों को चेतावनी दी थी। सोतीगंज में लगातार वाहन चोरों और कबाड़ियों के खिलाफ अभियान चलाया, फिर भी वहां पर लगातार चोरी के वाहन मिल रहे थे। इस दौरान भी सदर थाने की तीन शिकायत एसएसपी तक पहुंची। तीन बार कबाड़ी भी एसएसपी आवास पर पहुंचे। इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे थे।
भ्रष्टाचार मुक्त थाने के चस्पा थे पोस्टर
इंस्पेक्टर सदर बिंजेंद्र सिंह राणा ने थाने पर भ्रष्टाचार मुक्त के पोस्टर खुद चस्पा कराए थे। सोशल मीडिया पर पोस्ट भी वायरल की थी कि हमारा थाना अब भ्रष्टाचार से मुक्त है। इस पोस्ट को लेकर पुलिस में अलग अलग चर्चाएं थी।
जिले में भ्रष्टाचार का दूसरा मुकदमा
एसएसपी ने पुलिस पर भ्रष्टाचार का यह दूसरा मुकदमा दर्ज कराया है। 15 पुलिसवाले सस्पेंड किए गए। 100 से ज्यादा पुलिस वाले लाइन में भेजे। एक महीने पहले गंगानगर थाने में दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया गया था। अभी उस मामले में दरोगा फरार चल रहा है। अब सदर इंस्पेक्टर को भी पुलिस ने लिखापढ़ी में वांछित बताया है।
एसएसपी के जाल में फंसे इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल
एसएसपी को सोमवार को जैसे जानकारी मिली कि इंस्पेक्टर पैसे ले रहे हैं, उन्होंने गोपनीय जांच शुरू करा दी। मंगलवार को फिर एसएसपी को सूचना मिली कि कबाड़ी वकार से भी एक लाख रुपये की डील हो गई। 50 हजार लेकर सोमवार को वकार को छोड़ दिया गया। बाकी रकम वकार मंगलवार को देगा।
एसएसपी ने एसपी सिटी के नेतृत्व में टीम बना दी। हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह की घेराबंदी कर ली। शाम चार बजे तक वकार मुजफ्फरनगर से मेरठ पहुंचेगा। इसका पता एसएसपी की टीम को पहले से था। वकार के साथ सादी वर्दी में चार पुलिस वाले भी लग गए। सिपाही को वकार ने रजबन में बुलाया। पैसे लेते ही पुलिस टीम ने सिपाही को दबोच लिया और पुलिस लाइन ले गई। जहां चार घंटे एसएसपी, एसपी सिटी, एएसपी ने पूछताछ की। सिपाही ने इंस्पेक्टर की सारी पोल खोल दी। पुलिस ने वकार से भी पूछताछ की। इसके बाद दोनों को आमने-सामने बैठा दिया। जिस पर वसूली की रकम के बारे में अधिकारियों को बताया।
15 अगस्त को मिला था गैलेंट्री अवार्ड
इंस्पेक्टर सदर को 15 अगस्त पर गैलेंट्री अवार्ड मिला था। कंकरखेड़ा थाने में पोस्टिंग के दौरान दिल्ली के शातिर अपराधी शक्ति नायडू एनकाउंटर में ढेर हुआ था। जिसको लेकर तत्कालीन एसएसपी और इंस्पेक्टर को गैलेंट्री अवार्ड मिला था।
भ्रष्टाचार के मामले में बदनाम है सदर थाना
सोतीगंज में 80 कबाड़ी हैं, जोकि चोरी और लूट के वाहन काटते हैं। सदर थाना हमेशा ही भ्रष्टाचार के मामले में बदनाम रहता है। इस थाने में पोस्टिंग को लेकर इंस्पेक्टर और दरोगाओं में बोली तक लगती है। सपा और बसपा सरकार में सत्ताधारी नेताओं के करीबी इंस्पेक्टर को ही यहां का चार्ज मिलता था। योगी सरकार में भी इस थाने में भ्रष्टाचार का बोलबाला कम नहीं हुआ। पुलिस केवल दिखावे के लिए सोतीगंज के कबाड़ियों पर कार्रवाई करती है। यही वजह है कि चोरी और लूट के वाहन यहां कटना बंद नहीं होते।
स्मैक माफिया से पुलिस लेती थी पैसा
स्मैक माफिया तस्लीम ने जेल जाने से पहले सदर बाजार और रेलवे रोड थाना पुलिस की पोल खोली है। जिसका वीडियो खुद पुलिस वालों ने बनाया। तस्लीम ने बताया था कि वह बीट कांस्टेबल से लेकर पुलिस अधिकारियों तक लाखों रुपये हर महीने देता है। भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होने के बाद एसएसपी ने मामले की गंभीरता से जांच कराने की बात कहीं है।