बसपा की सोशल इंजीनियरिंग की बात करें तो जहां मेरठ लोकसभा सीट से बसपा ने भाजपा के कोर वोट बैंक रहे त्यागी समाज से देवव्रत त्यागी को प्रत्याशी बनाया है। वहीं बिजनौर से जाट समाज के चौ. विजेन्द्र सिंह को मैदान में उतार दिया है। सहारनपुर में माजिद अली और अमरोहा से मुजाहिद मुस्लिम को प्रत्याशी बनाया है। बागपत में गुर्जर, दलित, मुस्लिम, अतिपिछड़ों को साधने के लिए गुर्जर समाज से अरुण वैसला प्रत्याशी के नाम की घोषणा पर मोहर लगाने की तैयारी चल रही है।
मुजफ्फरनगर से दारा सिंह प्रजापति को चुनाव मैदान में उतारकर राजनीति का रुख बदल दिया है। बुलंदशहर सीट से अनुसूचित जाति से नगीना सांसद रहे गिरीश चंद को चुनाव मैदान में उतारा है। कैराना लोकसभा सीट से बसपा सैनी को प्रत्याशी बनाने की तैयारी में है।
कुल मिलाकर बसपा ने एससी, मुस्लिम, जाट, सैनी, प्रजापति, त्यागी, गुर्जर जाति के प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारकर बड़े वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर ली है।
रोचक रहा था बसपा व भाजपा का पिछला मुकाबला
2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने बड़े वोट बैंक मुस्लिम समाज से पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी को प्रत्याशी बनाया था। तीन लाख से अधिक दलित, साढ़े पांच लाख से अधिक मुस्लिम वोट समीकरण के साथ बसपा प्रत्याशी ने 48.05 प्रतिशत मतों के साथ 581455 वोट पाकर जीत के करीब पहुंच गए थे। मतगणना के अंतिम चरण में भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल ने 586,184 वोट पाकर हाजी याकूब को 4709 मतों से हराया था।
2019 में 10 सीटों पर जीते थे बसपा के सांसद
-कई सीटों पर दूसरे नंबर पर रही बसपा
-सहारनपुर से फजलुर्रहमान
-बिजनौर से मलूक नागर
-नगीना में गिरीश चंद
-अमरोहा में दानिश अली