- एक दिन पहले सपा मुखिया से मुलाकात के बाद अब बसपा के संपर्क में विजेंद्र सिंह
- सपा से रूचिवीरा, संजय लाठर और शहिद मंजूर के नाम दावेदारों में सबसे ऊपर
- बसपा में अभी मामला उलझा, मलूक नागर शांत, अब विजेंद्र सिंह के नाम की चर्चा
रजनीश त्यागी
बिजनौर। बिजनौर लोकसभा पर अभी भाजपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी चंदन चौहान के नाम की घोषणा हुई है। सपा और बसपा ने भी तक टिकट को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ऐसे में रोजाना नए-नए दावेदारों के नाम राजनीतिक गलियारों में गूंजते नजर आ रहे हैं।
एक दिन पहले तक लोकदल छोड़ चुके विजेंद्र सिंह के नाम का सपा में जाने का शोर मच गया था, वहीं सोमवार आते-आते उनके बसपा के संपर्क में होने की चर्चा होने लगी। सपा में अब संजय लाठर, शाहिद मंजूर और रूचिवीरा के नाम ने तेजी पकड़ ली है। इनके अलावा डॉ. रमेश तोमर, बृजवीर चौधरी के नाम भी दावेदारों में गिने जा रहे हैं।
बसपा की बात करें तो पिछले कुछ दिनों तक मलूक नागर को दोबारा टिकट मिलने का दावा किया जा रहा था, लेकिन फिलहाल स्थानीय संगठन की ओर से कोई हलचल नहीं है। मंगलवार को स्थिति कुछ हद तक साफ होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है लोकदल में राष्ट्रीय महासचिव पद पर रहे विजेेंद्र सिंह एक या दो दिन में बसपा का दामन थाम सकते हैं।
तीन मंडलों में फैली है बिजनौर लोकसभा
बिजनौर लोकसभा में पांच विधानसभा सीट शामिल हैं। इनमें बिजनौर जिले की सदर, चांदपुर विधानसभा है, वहीं मुजफ्फरनगर जिले की पुरकाजी और मीरापुर विधानसभा लगती हैं। मेरठ जिले से हस्तिनापुर विधानसभा इस लोकसभा में शामिल हैं। ऐसे में लोकसभा में जातीय गणित को समझने वालों का मानना है कि सपा और बसपा दोनों ही पार्टी भाजपा-रालोद गठबंधन के बाद बने समीकरण को देखकर ही प्रत्याशियों का चयन करने का मन बना रही है।
17 मार्च तक सपा घोषित करेगी प्रत्याशी : जिलाध्यक्ष
सपा जिलाध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि सपा 17 मार्च तक बिजनौर सीट पर प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर सकती है। यहां पर पांच से ज्यादा नाम दावेदारों की सूची में शामिल हैं। फिलहाल किसी दूसरी पार्टी से आने वाले नेता को टिकट की चर्चा नहीं है। पार्टी चुनाव की तैयारी में जुट चुकी है।
जल्द होगी स्थिति साफ : दलीप सिंह
बसपा जिलाध्यक्ष दलीप सिंह ने बताया कि टिकट को लेकर स्थिति साफ नहीं है। पार्टी हाइकमान इसी सप्ताह कुछ निर्णय ले सकती है। मंगलवार को भी कुछ गतिविधि हो सकती है। पार्टी हाइकमान का जो भी निर्णय होगा, संगठन उसी के अनुसार चुनाव की तैयारी में जुट जाएंगे।