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मायावती की राजनीति के लिए चुनौती बना भीम आर्मी संगठन, जानें कैसे ?

Wed, 24 May 2017 02:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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चंद्रशेखर आजाद और मायावती
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सहारनपुर में राजपूतों और दलितों के बीच चल रही जातीय हिंसा अब भयानकर रूप लेती नजर आ रही हैं। ये मामला पिछले एक-डेढ़ महीने से चला आ रहा है और अब तक इसमें दो लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई दर्जन लोग घायल हो चुके हैं। वहीं मंगलवार को हुए बवाल में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई तो दर्जनों को धारदार हथियार से घायल कर दिया गया। 
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आपको बता दें कि मंगलवार को मायावती के पहुंचने से पहले ही कुछ लोगों ने हमला किया और बिटौड़े समेत गलियों में आग लगा दी गई। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ गया और हमले का प्लान तैयार कर लिया। ठीक मायावती के निकलते ही सभा से लौट रहे दलितों पर राजपूतों ने हमला बोल दिया। उन्होंने दो को गोली मारी तो कई को धारदार हथियार से घायल कर दिया। इससे वहां और ज्यादा हिंसा भड़की। सूचना मिलने पर आला अफसर पहुंचे और अब एडीजी समेत तमाम अधिकारी मौके पर तैनात है।
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मायावती के सामने ये बड़ी चुनौती ?

बसपा सुप्रीमो मायावती
अब हम नहीं पूरा देश जानता है कि भीम आर्मी क्या है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करने के बाद देश का हर व्यक्ति जान गया कि भीम आर्मी क्या है। बता दें कि सहारनपुर बवाल से पहले कोई नहीं जानता था कि भीम आर्मी कोई संगठन है, लेकिन दलितों के सहारे हवा लेकर दिल्ली पहुंचे भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण को आज हर कोई जान गया है कि ये दलितों का युवा नेता बनकर सामने आ रहा है। लेकिन मायावती ने मंगलवार को सहारनपुर में सभा के दौरान साफ कह दिया कि किसी संगठन के बजाय बसपा के बैन तले कार्यक्रम करो किसी की हिम्मत नहीं होगी रोकने की। उनके इस बयान से साफ दिखता है कि किसी और राजनीतिक पार्टी से पहले मायावती को ही भीम आर्मी संगठन से खतरा नजर आ रहा हैं। कहीं दलित इसी संगठन से जुड़कर बसपा पार्टी का नाम तक भूल जाए। पिछले दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान चंद्रशेखर को भारी समर्थन मिलता दिखा। इस रैली में यूपी के अलावा बिहार, हरियाणा, झारखंड और पंजाब जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में दलित यहां पहुंचे थे।
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