सीमा प्रधान ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा
मेरठ में जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान ने अविश्वास प्रस्ताव बैठक से पहले ही इस्तीफा दे दिया। सीमा प्रधान के खिलाफ जिस तरह दो दिन पूर्व 30 सदस्य लामबंद हुए थे, उसके बाद तय हो गया था वह अविश्वास बैठक में सामना करने के बजाए इस्तीफा ही देंगी। सीमा प्रधान ने इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही उनके खिलाफ न केवल षड्यंत्र रचे गये, बल्कि लगातार अपमानित भी किया गया। यही नहीं दो दिन पूर्व एक धमकी भरा पत्र उन्हें प्राप्त हुआ, जिसमें उनके पति को जान से मारने की धमकी दी गयी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव 11 जनवरी 2016 को हुआ था और उसी दिन मतगणना के बाद सीमा प्रधान को विजेता घोषित कर दिया गया था। इसके बाद सीमा प्रधान ने 14 जनवरी को अध्यक्ष पद की शपथ ली थी। मात्र 15 माह 7 दिन ही वह कुर्सी पर रह पायी और बुधवार को इस्तीफा दे दिया। इस इस्तीफे की पटकथा प्रदेश में भाजपा सरकार के आते ही लिखनी शुरू हो गयी थी। जैसे ही पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार आयी, तभी तय हो चला था कि भाजपाई अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश करेंगे। लेकिन यह सब इतनी जल्दी होगा, किसी ने नहीं सोचा था। भाजपा के पक्ष में अध्यक्ष पद पर मतदान करने वाले 16 सदस्यों के साथ ही सत्ता बदलने पर चार और सदस्य भाजपा के पाले में आ गये और 30 मार्च को इन सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग करते हुए जिलाधिकारी को शपथ पत्र दिया। इसके अगले ही दिन चार और सदस्य भाजपाई पाले में आये और अविश्वास के लिए शपथ पत्र दे दिया।
इस प्रक्रिया के बाद शासन से अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने का निर्देश जारी हुआ और जिलाधिकारी ने 24 अप्रैल की तिथि बैठक के लिए तय कर दी। इसी बीच 17 अप्रैल को भाजपाई खेमे में 30 सदस्य खड़े नजर आये। इस पूरे माहौल को भांपते हुए अतुल प्रधान ने पार्टी हाईकमान से बात की और बुधवार को उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। प्रदेश में भाजपा सरकार बने एक माह ही हुआ है और इस दौरान बिना अविश्वास प्रस्ताव बैठक के ही मेरठ में भाजपा ने सपा को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी से हटा दिया। दूसरी तरफ अविश्वास प्रस्ताव जिला पंचायत की राजनीति में पहले भी आये हैं, लेकिन इस तरह इस्तीफा देने का यह अब तक पहला मामला है।