जिस तरह सिनौली साइट पर उत्खनन के दौरान अनेकों पुरावशेष समेत कंकाल आदि मिले हैं, इसे देखते हुए ग्रामीणों ने एएसआई अफसरों से विस्तारपूर्वक अन्य जगहों पर उत्खनन शुरू कराने की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि गांव के जगरोशन के खेत में बुवाई करते समय करीबन 30 साल पहले 15 फीट लंबी व दो फीट चौड़ी पक्की ईटों की कच्ची दीवार निकली थी। 2005-06 में सिनौली साइट से दुनिया पहले ही रूबरू हो चुकी है। उस समय खोदाई के दौरान दो तांबे की तलवार, एक तांबे की म्यान, चार सोने के कंगन, एक सोने से बना मनके का हार, एक सोने की लघु मानवाकृति, सैकड़ों मनकें, 177 मानव कंकाल समेत अन्य पुराशेष प्राप्त हुए थे। इतनी बड़ी संख्या में यहां से कंकाल व पुरावशेष मिलने के बाद इस साइट को विश्व के सबसे बड़े शवाधान केन्द्र के रूप में भी पुष्ट किया जा सकता था। जगरोशन पुत्र जोधाराम सहित अन्य ग्रामीणों ने गांव मे ही संग्रहालय केंद्र खोले जाने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि यदि गांव में संग्रहालय केंद्र खोला जाए तो आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होगा।
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