बताया गया कि 50 से अधिक सखियों ने बैंकिंग कार्य के लिए 40 हजार रुपये तक के लैपटॉप भी खरीदे। करीब दो महीने तक डिवाइस के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवा जारी रही, लेकिन उसके बाद कंपनी बागपत से चली गई और कोड बंद हो गए। कोड बंद होने से जमा-निकासी समेत अन्य बैंकिंग कार्य रुक गए और ग्रामीणों को फिर शाखाओं का रुख करना पड़ रहा है।
डिवाइस और लैपटॉप पर 35.75 लाख रुपये का निवेश फंसा
बड़ौत। जनपद में 210 से अधिक बीसी सखियों ने औसतन 7,500 रुपये की डिवाइस खरीदीं। इससे डिवाइस पर करीब 15.75 लाख रुपये खर्च किए। वहीं 50 से अधिक सखियों ने 40 हजार रुपये तक के लैपटॉप खरीदे। अधिकतम कीमत के आधार पर इन पर करीब 20 लाख रुपये खर्च हुए। दोनों को मिलाकर निवेश में 35.75 लाख रुपये की धनराशि फंस गई है।
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प्रीति बीसी सखी, बड़ौत
- फोटो : अमर उजाला
ये बोलीं बीसी सखियां
बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों के बीच से पैसे निकालकर डिवाइस खरीदी थी। दो महीने कोड चालू रहा। दो महीने में कमीशन के रूप में दस हजार की आमदनी हुई, लेकिन अब डेढ़ साल से कोड बंद होने से आर्थिक परेशानी बढ़ गई है। प्रीति, बीसी सखी, हसनपुर।
घर के खर्चों में कटौती करके डिवाइस के पैसे जुटाए थे। अब कोड बंद होने से आय भी रुक गई और लगाया पैसा भी फंस गया। अब जिसने उधार लिया था, उनका उधार चुकाने में मुश्किल हो रही है। साक्षी, बीसी सखी, जागोस
साक्षी बीसी सखी, बड़ौत
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निवेश की भरपाई और कोड चालू कराने की मांग
बीसी सखियों ने बैंक, संबंधित कंपनी और विभागीय अधिकारियों से समस्या बताकर कोड चालू कराने और डिवाइस-लैपटॉप पर लगाए पैसे की भरपाई की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से काम बंद रहने से कमीशन की आय का भी नुकसान हुआ है।
मामला जानकारी में है। बीसी सखियों के बंद कोड चालू कराने के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। समस्या के समाधान के लिए संबंधित कंपनी और बैंक से भी संपर्क किया जा रहा है। जल्द ही बीसी सखियों के कोड चालू कराने का प्रयास किया जाएगा। -अरुण कुमार पांडे, उपायुक्त, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, बागपत