अखिलेश सरकार ने भले ही मेरठ में साइकिल ट्रैक बनाया हो पर यहां आजादी के बाद से 2017 तक तीन सीटों पर कभी भी उनकी साइकिल नहीं दौड़ सकी। इन तीन में से इस बार कैंट सीट सपा ने गठबंधन में रालोद को दे दी है, जबकि दक्षिण और सरधना में अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
चार अक्तूबर 1992 को गठन के बाद से ही सपा मेरठ की सभी सीटों पर चुनाव लड़ती रही है। पार्टी को सबसे ज्यादा सफलता यहां किठौर सीट पर मिली है। यहां 2002, 2007 और 2012 के तीन विधानसभा चुनाव सपा के शाहिद मंजूर ने जीते हैं। सपा ने प्रदेश सरकार में मंत्री बनाकर शाहिद को इसका इनाम भी दिया। प्रभुदयाल वाल्मीकि ने सपा के टिकट पर 2002 और 2012 में हस्तिनापुर सीट रालोद की झोली में डाली थी।
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वहीं शहर सीट पर 2007 में पहली बार सपा के रफीक अंसारी ने जीत दर्ज की तो 2012 में सिवालखास से हाजी गुलाम मोहम्मद जीते। इस सीट पर भी एक-एक बार उनका खाता खुला है। रफीक अंसारी (2007) और गुलाम मोहम्मद (2012) में जीते। कैंट, दक्षिण और सरधना में सपा को खाता खोलने का इंतजार है।
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किस सीट पर सपा कितनी बार जीती
सीट जीते
किठौर 3
हस्तिनापुर 2
शहर 1
सिवालखास 1
इन सीटों पर कभी नहीं मिली जीत
कैंट, सरधना, दक्षिण
2017 में कहां किस नंबर पर रही सपा
किठौर: 79800 मत लेकर शाहिद मंजूर दूसरे नंबर पर रहे थे।
सिवालखास: 61421 मत पाकर हाजी गुलाम मोहम्मद दूसरे नंबर पर रहे।
शहर: भाजपा के डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई को हराकर सपा के रफीक अंसारी जीते।
कैंट: सपा ने गठबंधन में सीट कांग्रेस को दे दी थी। कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे।
मेरठ दक्षिण: सपा ने गठबंधन में यह सीट कांग्रेस को दी। कांग्रेस प्रत्याशी 39650 मतों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
सरधना: सपा के अतुल प्रधान 76296 मत लेकर दूसरे नंबर पर रहे।
हस्तिनापुर:63374 मत के साथ सपा के प्रभुदयाल वाल्मीकि दूसरे नंबर पर रहे।