प्रतिबंधों के साथ स्वीकृति
जनपद में जितने भी विकास कार्य चल रहे हैं, उन सभी में मिट्टी भराव की जरूरत पड़ रही है। इसके ठेके निर्माण कंपनी छोड़ रही है और उसी के आधार पर जिला प्रशासन इन्हें नियमों के प्रतिबंधों के तहत खनन की स्वीकृति भी प्रदान कर रहा है। लेकिन इसके बाद इस पूरे मामले में खेल शुरू हो जाता है। खनन की स्वीकृति अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के यहां से जारी होती है। सभी खनन स्वीकृति में खनन का क्षेत्रफल जिसमें गहराई एक से डेढ़ मीटर तक ही तय होती है और इसके साथ ही खनन कार्य की समय सीमा भी तय होती है।
बिना स्वीकृति के भी चल रहा खनन
जनपद के इंचौली, दौराला, भावनपुर, मुंडाली, कंकरखेड़ा, जानी, रोहटा थाना क्षेत्र ऐसे हें जहां लगातार खनन हो रहा है। इस समय जिले में करीब 37 स्थानों पर अवैध खनन हो रहा है। लेकिन स्वीकृति एक दर्जन की भी नहीं है। इस पूरे खेल में पुलिस तो शामिल है ही, साथ ही राजस्व विभाग के लेखपाल से लेकर ऊपर तक के अधिकारी भी शामिल हैं। जबकि स्वीकृति जारी करने और अवैध खनन को वैध बताने में खनन विभाग पूरी तरह शामिल है।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
यह बहुत ही गंभीर मामला है। पहले जहां भी खनन की स्वीकृति हुई है, उसकी जांच दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों से कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होंगे, उन पर सख्त कार्रवाई तय होगी।
- अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी
तथ्य छिपाकर कृत्य गलत
खनन विभाग और राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मेरे द्वारा स्वीकृति दी जाती है। यदि तथ्य छिपाकर या उसे बाद में बदलकर इस तरह का कृत्य हो रहा है तो बहुत गलत है। मैं इस पर जांच कराकर कार्रवाई करूंगा।
- सुभाष चंद्र प्रजापति, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)
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