इसलिए आते हैं खर्राटे
सांस लेने के दौरान हवा का बहाव गले में स्थित ऊतकों में कंपन पैदा करता है। जब गहरी नींद में सोते हैं तो मुंह, जीभ और गले की मांसपेशियों को आराम मिलता है। इस दौरान गले के ऊतक इतने ढीले हो जाते हैं कि वह आंशिक रूप से वायुमार्ग को ब्लॉक करने लगते हैं और इसकी वजह से कंपन होने लगता है। वहीं, ठंड के अलावा प्रदूषण के कण नाक, गले (श्वास नली) और फेफड़ों तक रुकावट पैदा करते हैं। नली में सूजन आ जाती है तो शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटता है और खर्राटे आते हैं।
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जैसी परेशानी-वैसा इलाज
डॉक्टर पहले उचित परीक्षण द्वारा कारण का निर्धारण करते हैं। अगर यह कारण नाक में मस्सा होना या नाक के परदे का तिरछा होना, टॅान्सिल, फूले हुए एडिनॉयड आदि है तो ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। यदि व्यक्ति के मोटापे के कारण उसकी सांस की नली में सिकुड़न है तो उसे पैप थेरेपी लेने की सलाह दी जाती है। मोटापा कम करना, पर्याप्त नींद लेना और धूम्रपान कम करने से भी आराम मिलता है।
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