उन्होंने आगे लिखा कि मेरठ में वन विभाग द्वारा जमीन हड़पे जाने के बाद किसान ने कई बार कार्रवाई की मांग की। अखिलेश ने लिखा सुनवाई न होने से हताश होकर खुद को आग लगाने वाले किसान को सबसे पहले अच्छे से अच्छा इलाज सुनिश्चित कर बचाया जाए और फिर उसकी जमीन लौटाई जाए।
उन्होंने लिखा कि भाजपा खेती और किसान दोनों की विरोधी है। जब से भाजपा आई है, तब से उसकी बुरी नजर किसानों की जमीन पर भी है और उनकी पैदावार पर भी। चाहे भूमि के अधिग्रहण का कानून रहा हो, खाद की बोरी में चोरी, महंगे बीज, बिजली, सिंचाई के रूप में लगातार बढ़ती कृषि लागत और फसल की लगातार घटती कीमत या काले कानून सब भाजपा की किसान विरोधी सोच का उदाहरण हैं। उन्होंने लिखा कि किसान भाजपा का दाना-पानी उठा देंगे।
कांग्रेस ने एक्स पर लिखी यह बड़ी बात
कांग्रेस ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए इस घटना को दुखद बताया। लिखा गया कि भाजपा सरकार में 'न्याय' नहीं मिल रहा है। पोस्ट में बताया गया कि यूपी में एक किसान का वन विभाग से जमीन को लेकर विवाद है। आगे लिखा गया कि पिछले कई दिनों से किसान न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा था, लेकिन यूपी की भाजपा सरकार में न्याय न मिल सका। किसान ने आज यानी शुक्रवार को निराश होकर एसडीएम ऑफिस के बाहर खुद को आग लगा ली।
किसान ने किया आत्मदाह का प्रयास
मेरठ के मवाना में एसडीएम कार्यालय के सामने एक किसान ने आत्मदाह का प्रयास किया। इससे वहां हड़कंप मच गया। वहीं, आनन-फानन किसान को सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां से मेरठ के लिए रेफर कर दिया गया। सीएचसी के चिकित्सक डॉक्टर अनिल शर्मा ने बताया कि किसान 70 फीसदी जल गया है। उसे मेरठ के लिए रेफर किया गया है। वहीं, वन विभाग पर किसान की फसल को जबरन जोतने का आरोप लगाया गया है।
ये है पूरा मामला
हस्तिनापुर थाना क्षेत्र के अलीपुर मोरना गांव के समीप वन विभाग के कृष्ण वन ब्लॉक में विभाग की करीब तीन हेक्टेयर भूमि पर पिछले कई वर्षों से ग्रामीणों द्वारा अवैध कब्जा था, जिस पर वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए भूमि को अपने कब्जे में ले लिया। डीएफओ राजेश कुमार के निर्देशन पर बृहस्पतिवार को वन विभाग के सर्वेयर विजेंद्र सिंह, रेजर रविकांत व स्थानीय लेखपाल सचिन तोमर, रोहित शर्मा, राजस्व निरीक्षक अग्रसेन, डिप्टी रेंजर मनोज कुमार सहित दर्जनों अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची थी। उन्होंने सरकारी भूमि पर वन विभाग का ट्रैक्टर चलाकर उसे कब्जा मुक्त कराया था।
उन्होंने बताया कि जहां पर भी वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण है, उन्हें मुक्त कराया जा रहा है। बताया कि यह अभियान लगातार चलता रहेगा। खादर क्षेत्र में गंगा किनारे करीब पांच सौ हेक्टेयर भूमि को कब्जा मुक्त और चिन्हित कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर वन विभाग द्वारा पौधारोपण किया जाएगा। इसके लिए तैयारी चल रही है।
डीएम दीपक मीणा का कहना है कि किसान की स्थिति अभी गंभीर और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा कि एसडीएम और सीएमओ वहीं मौजूद हैं। जैसे ही उनकी स्थिति में सुधार होगा तो मामले में जांच की जाएगी।