भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी करने वाले सातों आरोपियों ने यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल कर मतदाता पहचान पत्र बनाने का जुर्म तो कबूल किया, लेकिन रिमांड पर पूछताछ में एसटीएफ को गुमराह किया और कोई जानकारी नहीं दी। एसटीएफ ने 24 घंटे की रिमांड पूरी होने पर आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों के वकील भी साथ रहे।
भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी करने वाले विपुल सैनी निवासी मच्छरहेड़ी कोतवाली नकुड़, आशीष जैन निवासी आजादपुर, अरमान मलिक उर्फ मोहम्मद नियाज आलम निवासी अमन विहार, आदित्य खत्री निवासी कमल विहार, नितिन कुमार निवासी सराय बस्ती दिल्ली, दीपक मेहता, संजीव मेहता निवासी जनपद बारां राजस्थान को एसटीएफ ने गुरुवार को 24 घंटे की रिमांड पर लिया था। आरोपियों पर भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी कर मतदाता पहचान पत्र बनाने का आरोप है, जिनके खिलाफ साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
इन बिंदुओं पर की गई पूछताछ, दिए यह जवाब
एसटीएफ ने आरोपियों से पूरी रात पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक विपुल सैनी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट का यूजर नेम व पासवर्ड उसे अरमान मलिक ने बताया था। अरमान मालिक ने एसटीएफ को बताया कि भारत निर्वाचन आयोग में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्य कर चुके आशीष और नितिन ने उसे पासवर्ड उपलब्ध कराया। इसके अलावा आरोपियों ने एसटीएफ को कोई जानकारी नहीं दी और हर सवाल पर एसटीएफ को गुमराह किया।
अमीर बनना चाहते थे
सूत्रों के मुताबिक आरोपी विपुल सैनी और अरमान मलिक ने पूछताछ में बताया कि पैसा कमाकर अमीर बनने के लिए उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी की। एक मतदाता पहचान पत्र बनाने पर वह 200 रुपये तक वसूल लेते थे। अरमान मलिक ने बताया कि यूजरनेम और पासवर्ड देने वाले आशीष जैन और नितिन भी प्रत्येक कार्ड पर 50 रुपये तक उनसे लेते थे।
कौन है विकेश, कहां रहता है, पता नहीं
विपुल सैनी ने विकेश निवासी पश्चिमी यूपी का नाम भी लिया था, जिसके आधार पर उसे एफआइआर में नामजद किया गया था। लेकिन उसकी गिरफ्तार अभी तक नहीं हो सकी है। एसटीएफ की पूछताछ में भी विकेश के पते की जानकारी नहीं मिल पाई है। वह फरार चल रहा है, जिसकी गिरफ्तारी को एसटीएफ की टीमें दबिश दे रही हैं।
हरिओम की अहम भूमिका, पकड़े जा चुके दो साथी
इस मामले में मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी हरिओम उर्फ हर्षा की अहम भूमिका रही है। वह भी फरार चल रहा है, जबकि उसके दो साथियों को मध्य प्रदेश पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। कुछ दिन पूर्व हरिओम के पकड़े जाने की भी चर्चा रही थी, लेकिन स्थानीय पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर पाई।
आरोपियों की रिमांड की अवधि पूरी हो गई है, जिसको कोर्ट में पेश कर एसटीएफ ने जेल भेज दिया है। मामले की जांच और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी एसटीएफ ही करेगी। -
राजेश कुमार, एसपी सिटी