अब तक शौक और निशानेबाजी के लिए प्रयोग की जाने वाली एअर गन और पिस्टल के लिए भी अब शस्त्र लाइसेंस लेना होगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए गजट जारी किया है, जिसका जुलाई से पालन होना है।
एअर गन और पिस्टल में छर्रे प्रयोग होते हैं। मेले आदि में गुब्बारे फोड़ने के अलावा अब स्कूल और प्राइवेट शूटिंग रेंज भी इनका प्रयोग निशानेबाजी सिखाने के लिए हो रहा है। इस एअर गन और पिस्टल में .177, .20, .22 और .25 बोर के छर्रे प्रयोग होते हैं। कुछ रायफल में नुकीले छर्रे तो कुछ में छोटी लोहे की बॉल को प्रयोग किया जाता है। जबकि शिकारी अक्सर .22 या .25 बोर की गन प्रयोग करते हैं। इसकी मारक क्षमता 50 से 100 मीटर तक होती है। अमूमन भारतीय एअर गन तीन हजार से चालीस हजार रुपये तक की है। जबकि विदेशी एअर गन पांच लाख रुपये तक की आती हैं। विदेशी गन में सिलेंडर प्रयोग की भी सुविधा होती है, जिसके कारण उसकी मारक क्षमता सौ गुना ज्यादा तेज हो जाती है। प्रोफेशनल शिकारी इस गन का प्रयोग करते हैं।
जान भी ले सकते हैं छर्रे
जानकारों के अनुसार एअर गन खिलौना नहीं, बल्कि किसी की जान भी ले सकती है। मेले आदि या आम शूटिंग रेंज में प्रयोग होने वाली गन के छर्रे .177 बोर के होते हैं। लेकिन यह भी यदि पास से लगें तो घायल कर सकते हैं। जबकि .22 और .25 बोर के छर्रे या बॉल यदि सिर या दिल के पास लग जाये तो जान भी ले सकते हैं।
इसलिए जारी हुआ गजट
सरकार के सामने करीब दो दर्जन ऐसे मामले आए हैं, जिनमें एयर गन का दुरुपयोग किया गया। इस कारण सरकार ने एअर गन के लिए लाइसेंस लेने का गजट जारी किया है।
कारण बताना होगा
एअर गन लाइसेंस के लिए आम शस्त्र लाइसेंस की तरह आवेदन करते हुए इसे रखने का कारण भी बताना होगा पुलिस रिपोर्ट भी लगेगी। इसके लिए एक हजार रुपये शुल्क होगा। जबकि नवीनीकरण शुल्क 500 रुपये होगा।