विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर विशेष
सावधानी बरतें तो हेपेटाइटिस रहेगा दूर
सरकार ने 2030 तक खत्म करने का रखा लक्ष्य
मेरठ। अगर आप बिना डाक्टर की सलाह के दवा खाते हैं तो ये आदत छोड़ दीजिए। टीवी पर विज्ञापन देखकर या हर बात को मामूली मामूली मानकर खुद से दवा लेना आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। हेपेटाइटिस के मिले केसों में कई मामले ऐसे निकलकर आये, जिनमें कोई लक्षण सामने आया ही नहीं।
अधिकांश लोग बुख़ार, थकान, जोड़ो या स्नायु में दर्द, और भूख न लगने पर ये समझते हैं कि उन्हें ये सब सामान्य है और वे अपनी समझ से दवा लेते रहते हैं। ये लक्षण हेपेटाइटिस के हो सकते हैं। हेपेटाइटिस शांत संक्त्रस्मण है । अधिकतर लोग अपने आप को स्वस्थ समझते हैं, और उन्हें पता नहीं होता है कि उन्हें संक्त्रस्मण है। इसका अर्थ है कि उनसे अनजाने में ही वाइरस फैलता रहता है। यहां तक कि उनमें खुद में संक्रमण खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। हेपेटाइटिस की बीमारी तेजी से पैर पसार रही है। जहां एक तरफ सरकार ने साल 2030 तक इसे पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है, तो दूसरी तरफ इसे लेकर कुछ भ्रांतियां भी हैं। हेपेटाइटिस के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।
सिर्फ छूने से नहीं फैलता
यह एक संक्रामक रोग है, मगर सिर्फ छूने से नहीं फैलता है। सावधानियां बरतकर इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। लिहाजा इसके लिए जागरूक रहने की जरूरत है। जिला अस्पताल में प्रदेश का एकमात्र हेपेटाइटिस सी क्लीनिक है, जिसमें मरीजों का मुफ्त इलाज होता है। यहां छह हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी क्लीनिक चलाने वाले टीम के सदस्य डॉ. हेमंत ने बताया कि हेपेटाइटिस यकृत की सूजन है, जिसे यकृत ऊतकों में सूजन वाली कोशिकाओं की मौजूदगी से पहचाना जाता है। हेपेटाइटिस एक्यूट और क्रोनिक दो प्रकार का होता है। एक्यूट हेपेटाइटिस की अवस्था तब होती है, जब यह कम से कम छह महीनों तक रहता है। क्रोनिक हेपेटाइटिस की अवस्था तब होती है, जब यह लंबे समय तक बना रहता है।
सावधानी बरतें तो बच सकते हैं बीमारी से
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीकेबंसल को हेपेटाइटिस के लिए एक मॉडल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिस पर वह काफी समय से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण अधिक गंभीर होता है। हेपेटाइटिस का संक्रमण होने पर इसका इलाज करवाना जरूरी है। साथ ही हेपेटाइटिस की जांच अवश्य कराएं। हेपेटाइटिस के खतरे को पहचाने और सतर्क रहें, जिससे हेपेटाइटिस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
हेपेटाइटिस के लक्षण
भूख कम होना, पीलिया
कम परिश्रम पर अधिक थकान महसूस करना
बार-बार बुखार होना
मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द रहना
उल्टियां होना, त्वचा में पीलापन आना
यह बरतें सावधानियां
संक्रमित व्यक्ति के इस्तेमाल की चीजें रेजर, कैंची जैसी नुकीली वस्तुएं, तौलिये और कपड़े आदि अलग रखें।
मरीज को अगर कोई घाव हो गया हो तो उसे खुला न छोड़ें।
पांच प्रकार का होता है रोग
हेपेटाइटिस ए और ई : ये दूषित पानी पीनी से और दूषित भोजन करने से फैलते हैं।
हेपेटाइटिस बी और सी : ये संक्रमित खून चढ़ाने, संक्रमित सुईं-सिरींज के प्रयोग, असुरक्षित यौन संबंध और मां से शिशु में फैलता है।
हेपेटाइटिस डी: जो हेपेटाइटिस बी से संक्रमित होते हैं, वे हेपेटाइटिस डी से भी संक्रमित हो सकते हैं।