रेजिंमेंट में आयोजित कार्यक्रम
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जाट रेजीमेंट में कंपनी कमांडर रहे वीएस ढाका ने बताया कि पाकिस्तान ने अमृतसर सहित हमारे पांच हवाई अड्डों पर हमला किया, जिसके बाद युद्ध का एलान हो गया। भारत इस युद्ध के लिए एक वर्ष से तैयारी कर रहा था। भारतीय थल सेना ने पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में तीन तरफ से हमला किया। पश्चिम में दो कोर, उत्तर में 33 कोर और पूर्व की तरफ से 4 कोर ने हमला किया। नौसेना ने समुद्र की तरफ से और वायु सेना ने आकाश से हमले शुरू किए।
वीएस ढाका ने बताया कि उनकी जाट रेजीमेंट के साथ 21 राजपूत और फस्ट नागा ने पश्चिम की तरफ से हमला किया। ढाका में पेरा ड्रापिंग की गई। तीन दिसंबर से 15 दिसंबर तक भीषण युद्ध हुआ। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने आत्म समर्पण कर दिया। पाकिस्तानी बलों के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एके नियाजी ने भारत के पूर्वी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।
पाइन डिवीजन-नाइन डिव ने किए दुश्मन के दांत खट्टे
भारत-पकिस्तान युद्ध में सेना की पाइन डिवीजन-नाइन डिव ने जैसोर में दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए। पाकिस्तानी सेना के हजारों सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा था। इस युद्ध में मेरठ के भी 20 वीर शहीद हुए। जैसोर की जीत का जश्न सेना की तरफ से 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इस युद्ध में लगभग 3900 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। 9851 के करीब बुरी तरह से घायल हो गए थे। युद्ध में सेना की नाइन डिवीजन की अहम भूमिका थी।
नाइन डिवीजन जैसोर में हुई हावी
14 दिन तक चले युद्ध के बाद सेना की नाइन डिवीजन जैसोर पहुंची तो लड़ाई में भारतीय सेना हावी होती चली गई। पांच दिसंबर को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिए और भारतीय सेना को जीत हासिल हुई। हर साल पाइन डिव में जीत के योद्धाओं के पराक्रम की कहानियां सुनाई जाती हैं। शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं। वीर नारियों को सम्मानित किया जाता है।
भारत-पाक युद्ध 1971 में मेरठ के शहीद
ले. कर्नल प्रभात कुमार, कैप्टन मदन पाल, ले. वीके सहगल, ले. पुष्पेंद्र वेद, नायक सूबेदार मामचंद, हवलदार हरपाल सिंह, लांस नायक अलबेल सिंह, सिपाही रामपाल सिंह, सिपाही राजेंद्र सिंह, सिपाही महेंद्र सिंह, सिपाही सीताराम, सीमेन ओम प्रकाश, सिपाही हुसैन सिंह, सिपाही भोपाल सिंह, सिपाही जय प्रकाश, सिपाही सेवाराम, सिपाही राजबीर सिंह, सिपाही ओमपाल सिंह शहीद हुए।
मेजर किशन सिंह
वर्ष 1971 के युद्ध में पश्चिमी क्षेत्र में पाकिस्तान के शकरगढ़ की ओर से लड़ाई लड़ी गई। यहां सबसे पहले अंतिम रेलवे स्टेशन चकमरू पर कब्जा किया। वहां से आगे बढ़ते हुए मरयाल स्टेशन पर कब्जा किया। लड़ाई के लिए मेजर किशन सिंह को मेंशन-इन-डिस्पेच मिला।
मेजर जितेंद्र कुमार तोमर
राजपुताना राइफल्स में कंपनी कमांडर मेजर जितेंद्र जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। तीन दिसंबर को उनकी अगुवाई में कंपनी ने पाकिस्तान सेना के हमले को विफल कर दिया, जिससे पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ। बंकर-बंकर घूमते हुए वह लगातार जवानों का हौसला बढ़ाते रहे। दुश्मन द्वारा कंपनी के एक पोजीशन पर दोबारा कब्जा कर लिया तो उन्होंने काउंटर अटैक कर दुश्मन को नुकसान पहुंचाया और पीछे हटाया।
ब्रिगेडियर स्व. राजकुमार सिंह महावीर चक्र
14वीं पंजाब बटालियन के कमान अधिकारी थे। उन्हें पूर्वी क्षेत्र के गरीबपुर-जगन्नाथपुर में दुश्मन को भारतीय सीमा में घुसने से रोकना था। दुश्मन ने उस क्षेत्र पर इंफेंट्री बटालियन और एक स्क्वाड्रन से हमला किया। उनकी क्षमता के लिए उन्हें महावीर चक्र से नवाजा गया।
कर्नल हरीश चंद्र शर्मा वीर चक्र
मेजर हरीश शर्मा पूर्वी क्षेत्र में जाट रेजिमेंट में एक कंपनी कमांडर थे। मौके पर दुश्मन से लड़ते हुए उन्हें पीछे हटाया और उपस्थित नावों के बेड़े से पुल बनाकर रास्ता बनाया। इससे दूसरे दल नदी पार कर सके। नौ दिसंबर को एक क्षेत्र पर कब्जा जमा लिया और दुश्मन के जवाबी हमलों को वहीं से नाकाम करते रहे।