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भैंस चोरी

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हस्तिनापुर। एसीएमओ डॉ. देवीदास ने शुक्रवार को सीएचसी का निरीक्षण किया। जिसमें केंद्र के मैदान में गंदगी एवं गाजर घास देखकर नाराजगी जर्ताई। उन्होंने मैदान की सफाई कराने के निर्देश दिए। इस पर सीएचसी प्रभारी डॉ. सतीश ने परिसर स्थित मैदान में खड़ी गाजर घास को कटवाकर सफाई कराई। एसीएमओ ने दवाघर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीजों को पूर्ण दवा की सुविधा देने के निर्देश दिए। जांच में एक एंबुलेंस में 25 केस ग्यारह दिन में मिले। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र की आशाओं एवं चिकित्सकों की मीटिंग ली। जिसमें गर्भवती महिला जांच पोषण संबंधी परिवार नियोजन टीकाकरण, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, ग्रामीण स्वराज अभियान, टीकाकरण पर वार्ता की एवं कुपोषित बच्चे एनआरसी भेजने पर चर्चा की गई। वहीं, परिवार नियोजन के संबंध में वार्ता की। रात्रि में लगने वाले गांवों में ग्रामीण चौपाल में स्तनपान के संबंध में तथा कम वजन वाले बच्चों को एसएनसीयू पर रेफर करने अशाओं के रिकॉर्ड पर चर्चा की। इस अवसर पर सीएचसी प्रभारी डॉ. सतीश भास्कर ने यहां तथा आसपास के क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्रों पर हो रहे कार्यों की जानकारी दी। ब्लॉक कम्प्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर रीना सैनी, डॉ. राहुल, डॉ. चंदन, डॉ. रक्षित, रामअवतार सैनी आदि उपस्थित रहे।
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आचरण के बिना ज्ञान का महत्व नहीं
हस्तिनापुर। जैन तीर्थ हस्तिनापुर के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में 26वें दिन शुक्रवार को दूर-दूर से श्रद्धालुगण सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम की शुरूआत नित्य, प्रतिदिन के भांति मुख्य वेदी में विराजमान त्रय तीर्थंकरों के जलाभिषेक के साथ की गई। सभी भक्तों ने त्रिमूर्ति जिनालय में विधान की मांगलिक क्रियाओं मे दिग्बन्धन, पात्र शुद्धि, जल शुद्धि, सकलीकरण की क्रियाएं की। शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रेमचंद जैन, कांता जैन, राजीव, विभा, जतिन तथा सहयोग की इन्द्रसैन को मिला। शांतिनाथ विधान के प्रमुख पात्रों का एवं पुण्यार्जकों का क्षेत्र के मंत्री प्रद्युम्न जैन ने मंगल तिलक, माल्यार्पण कर स्वागत किया। परम पूज्य मुनिश्री भावभूषण जी महाराज ने प्रवचन के मध्य में कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति धर्म प्रधान संस्कृति है। यहां भोग को नहीं योग को, यहां साधन को नहीं साधना को, यहां दवा के साथ दुआ को, यहां ज्ञान के साथ गुण को तथा तप के साथ चरित्र का महत्व दिया जाता है। चरित्र की सर्वत्र पूजा होती है। आचरण से हीन ज्ञान बोझ समान है। कोई व्यक्ति कितना ही ज्ञानी क्यों न हो जब तक उसका आचरण ठीक में नहीं है। तब तक उसकी और उसके ज्ञान का महत्व नहीं है। वह पूज्य नहीं है ज्ञान थोड़ा हो किन्तु आचरण से ठीक हो तो वह सज्जन पुरुष लोक में पूज्य एवं प्रभावशाली बन जाता है। गृहस्थ में रहते व्यक्ति चाहे कितना ही ज्ञानी हो परंतु उसकी अष्ट द्रव्य से पूजा का विधान आगम नहीं है। अनुष्ठान में ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी के दिशा निर्देशन में विधान की मांगलिक क्रियाएं युवा विद्ववान आशीष जैन ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराईं। संध्याकालीन बेला में ब्रहमचारिणी सुनीता दीदी द्वारा मंगलमय प्रवचन किया गया। इसके बाद संगीतमय महाआरती में श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के भजनों पर भक्ति नृत्य किया। रात्रि में धार्मिक भजन प्रतियोगिता, आयोजित की गई। 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान के 26वें दिन 100 परिवारों ने भाग लिया। सभी ने हर्षोल्लास पूर्वक जिनेन्द्र भगवान की आराधना की। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के अध्यक्ष अनिल कुमार जैन दिल्ली, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, उपाध्यक्ष सतेन्द्र कुमार, अजीत प्रसाद, धन प्रकाश, नवीन कुमार, सुशील जैन, मंत्री प्रद्युम्न जैन, मुकेश कुमार महाप्रबंधक, उपप्रबंधक अशोक जैन, उमेश, मणिचंद, अतुल, कमल, सुदर्शन, दीपक आदि का सहयोग रहा।
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